अश्विनी वैष्णव ने लॉन्च किया 'सेमीकॉन 2.0' पोर्टल, 12 नई इकाइयों को मिली मंजूरी
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सेमीकॉनडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए 'सेमीकॉन 2.0' वेब एप्लिकेशन पोर्टल शुरू किया। साथ ही इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (ECMS) के तहत 12 नई परियोजनाओं को मंजूरी दी गई।

भारत के सेमीकॉनडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। शुक्रवार को केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने 'सेमीकॉन इंडिया प्रोग्राम' के अंतर्गत 'सेमीकॉन 2.0' के लिए एक नया वेब एप्लिकेशन पोर्टल लॉन्च किया। इस पोर्टल के माध्यम से अब पिलर 2, 3 और 4 के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू हो गई है। पिलर 2 मशीनों और सामग्री, पिलर 3 और फैब्स (fabs) की स्थापना, और पिलर 4 ATMP/OSAT उद्योग को मजबूत करने से संबंधित है।
इस अवसर पर मंत्री ने 'इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम' (ECMS) के तहत 12 नए आवेदकों की भी घोषणा की। इन परियोजनाओं में कुल 7,503 करोड़ रुपये का निवेश होने का अनुमान है, जिससे 39,045 करोड़ रुपये के उत्पादन और 7,127 प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे। ये परियोजनाएं गुजरात, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, पंजाब, तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश के सात राज्यों में फैली हुई हैं।
ECMS के तहत नई मंजूरियां और उत्पादों की विविधता
मंजूर की गई इन 12 परियोजनाओं में इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स, सप्लाई चेन उत्पादों और पूंजीगत सामान (कैपिटल गुड्स) के निर्माण पर जोर दिया गया है। कंपोनेंट कैटेगरी में NeST ICELR प्राइवेट लिमिटेड को मल्टी-लेयर PCB, TDConnex (चेन्नई) प्राइवेट लिमिटेड को रिले, मॉडर्न ऑटोमोटिव्स लिमिटेड को हीट सिंक, और वोल्टिक्स सेमीकॉन प्राइवेट लिमिटेड को स्पेशलिटी सिरेमिक्स के निर्माण की मंजूरी दी गई है।
सप्लाई चेन को मजबूत करने के लिए इंडो एशिया कॉपर लिमिटेड को कॉपर फॉयल, TACC लिमिटेड को लिथियम-आयन सेल के लिए एनोड मटेरियल, विद्युता मटेरियल्स प्राइवेट लिमिटेड को कैथोड एक्टिव मटेरियल, एनरफोली LLP को पॉलीप्रोपाइलीन फिल्म, और सरफेस मॉडिफिकेशन टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड को कैमरा रिम बनाने की अनुमति मिली है। विशेष रूप से, ECMS के तहत पहली बार कॉपर फॉयल, कैथोड एक्टिव मटेरियल और स्पेशलिटी सिरेमिक्स के निर्माण को मंजूरी दी गई है, जिससे देश में इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स और अपस्ट्रीम मटेरियल की रेंज और व्यापक हो गई है।
पूंजीगत सामान और उनके पुर्जों के घरेलू निर्माण के लिए भी मंजूरी दी गई है। इसमें प्रिसिजन मोल्ड और टूलिंग के लिए TDConnex (चेन्नई) प्राइवेट लिमिटेड, कैपिटल इक्विपमेंट के लिए रॉकवेल ऑटोमेशन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, और फैक्ट्री ऑटोमेशन के लिए विप्रो परी रोबोटिक्स प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं। इन मंजूरियों के साथ, ECMS के तहत अब तक 16 राज्यों में 34 उत्पादों से जुड़े कुल 118 आवेदनों को मंजूरी मिल चुकी है। इससे कुल 77,051 करोड़ रुपये का निवेश, 5,73,146 करोड़ रुपये का उत्पादन और 81,755 लोगों के लिए रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है।
सेमीकॉन 2.0 की रणनीति और आत्मनिर्भरता का लक्ष्य
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 'इंडिया सेमीकॉनडक्टर मिशन' (ISM) के तहत 1,27,500 करोड़ रुपये के वित्तीय परिव्यय के साथ 'सेमीकॉन 2.0' को मंजूरी दी है। यह पहल छह रणनीतिक पिलरों पर केंद्रित है: चिप्स की डिजाइनिंग, मशीनें और सामग्री, और फैब्स की स्थापना, ATMP/OSAT उद्योग को मजबूत करना, अनुसंधान और विकास (R&D), और प्रतिभा विकास।
अश्विनी वैष्णव ने कहा कि भारत की इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण यात्रा अब केवल असेंबली से आगे बढ़कर एक व्यापक घरेलू वैल्यू चेन विकसित करने की दिशा में बढ़ गई है। उन्होंने बैटरी सेल, कॉपर फॉयल, कॉपर-क्लैड लैमिनेट और हाई-एंड प्रिंटेड सर्किट बोर्ड (PCB) के क्षेत्र में बढ़ती क्षमताओं का जिक्र किया। मंत्री ने बताया कि इस योजना के तहत मंजूर की गई इकाइयों में से लगभग 50% MSME क्षेत्र से जुड़ी हैं, जिससे सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों के लिए नए अवसर पैदा हो रहे हैं।
'सेमीकॉन 2.0' का मुख्य फोकस उपकरण, सामग्री, रसायन और गैसों के क्षेत्र में एक मजबूत इकोसिस्टम बनाने पर होगा। इसका लक्ष्य कम से कम तीन प्रमुख उपकरण निर्माताओं और पांच रसायन व गैस कंपनियों को भारत में लाना है। मंत्री ने उद्योग जगत के हितधारकों से आग्रह किया कि वे आपस में सहयोग करें और अपनी विशेषज्ञता साझा करें, ताकि भारत को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकॉनडक्टर विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित किया जा सके।
पिछले एक दशक में भारत में सेमीकॉनडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में बुनियादी बदलाव आया है। 'सेमीकॉन 1.0' के तहत छह राज्यों में 12 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई थी, जिनमें 1.64 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश हुआ है। इनमें से 5 परियोजनाओं में अक्टूबर 2026 तक व्यावसायिक उत्पादन शुरू हो चुका है। इसके अलावा, 105 स्टार्टअप्स को EDA टूल्स तक पहुंच दी गई है और 15 स्टार्टअप्स को वेंचर कैपिटल फंडिंग मिली है। 'चिप्स टू स्टार्टअप' (C2S) प्रोग्राम के तहत 332 संस्थानों को EDA टूल्स उपलब्ध कराए गए हैं और लगभग 70,000 छात्रों को प्रशिक्षित किया जा चुका है।
पृष्ठभूमि
भारत सरकार 'इंडिया सेमीकॉनडक्टर मिशन' (ISM) के तहत देश के सेमीकॉनडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए विभिन्न नीतिगत हस्तक्षेपों और रणनीतिक पहलों को अमल में ला रही है। 'सेमीकॉन 1.0' के सफल कार्यान्वयन के बाद, 'सेमीकॉन 2.0' को 1,27,500 करोड़ रुपये के बजट के साथ मंजूरी दी गई है, जिसका उद्देश्य डिजाइन, विनिर्माण, अनुसंधान और प्रतिभा विकास के सभी स्तरों पर आत्मनिर्भरता हासिल करना है।
स्रोत
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