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खेल · ओडिशा

तन्वी पात्री के पिता ने बताईं यूथ ओलंपिक्स की मुश्किलें: मच्छर, बिना एसी कमरा और 44 घंटे की यात्रा

बैडमिंटन खिलाड़ी तन्वी पात्री के पिता रबिनारायण पात्री ने बताया कि डकार में हुए यूथ ओलंपिक्स के दौरान उनकी बेटी को लंबी यात्रा, मच्छरों और बिना एसी वाले कमरे जैसे कई संकटों का सामना करना पड़ा।

तस्वीर: tv9hindi.com

बैडमिंटन खिलाड़ी तन्वी पात्री ने हाल ही में सेनेगल के डकार में आयोजित यूथ ओलंपिक्स में सिल्वर मेडल जीता है। हालाँकि, इस कामयाबी के पीछे कई कठिनाइयाँ छिपी हैं। तन्वी के पिता और प्रशिक्षक रबिनारायण पात्री ने बताया कि उनके लिए यह सिर्फ शुरुआत है और कोर्ट के बाहर भी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। इनमें सबसे बड़ी समस्या लंबी यात्रा, मच्छरों का प्रकोप और बिना एयर कंडीशनर वाले कमरे थे। 15 वर्षीय तन्वी ने फाइनल में 17 वर्षीय चीनी खिलाड़ी ज़ांग यी ज़िन के खिलाफ 82 मिनट तक का मुकाबला खेला था।

यात्रा और स्वास्थ्य संबंधी संकट

रबिनारायण पात्री ने बताया कि वर्ल्ड जूनियर्स के लिए उनकी यात्रा 28 घंटे की थी, जबकि यूथ ओलंपिक्स के लिए यह 44 घंटे तक बढ़ गई। उन्होंने बताया कि बेंगलुरु से सुबह 8 बजे निकली तन्वी रात 10 बजे तक दिल्ली में प्रशासनिक कार्यालयों में रही, क्योंकि भारतीय दल के किसी सदस्य के दस्तावेज खो गए थे। इसके बाद डकार पहुंचने में 21 घंटे की उड़ान लगी। इस लंबी प्रक्रिया के दौरान तन्वी डिहाइड्रेशन का शिकार हो गईं और खेलों से पहले 7 दिनों तक बुखार से जूझती रहीं। पिता ने बताया कि उन्हें आयोजकों के परिवहन के लिए 4.5 घंटे एयरपोर्ट पर बिना भोजन या पानी के इंतजार करना पड़ा था।

आवास और पीढ़ीगत अंतर

डकार में तन्वी ने पहले दिन ही फोन करके बताया कि उनके कमरों में मच्छर थे और एसी नहीं था। हालाँकि, परिवार ने ऑल आउट और रिपेलेंट भेजकर स्थिति को संभाला, लेकिन गेम्स विलेज से उनकी तिहरी परत वाली कंबल और चादर चोरी भी हो गई। रबिनारायण का मानना है कि शिकायत करने से कुछ नहीं बदलता, इसलिए खिलाड़ियों को तैयार रहना चाहिए। उन्होंने नई पीढ़ी, जिसे 'जेनरेशन अल्फा' कहा जाता है, की परवरिश के बारे में भी बात की। उन्होंने कहा कि इस पीढ़ी के खिलाड़ी सुबह जल्दी उठने को पसंद नहीं करते और अगर उन्हें 5 बजे उठने के लिए कहा जाए तो वे चिढ़ जाते हैं। इसलिए वह तन्वी को 8-9 बजे तक सोने देते हैं, ताकि वे अच्छे नाश्ते के बाद प्रशिक्षण में अच्छा प्रदर्शन कर सकें।

भविष्य के संदर्भ में, तन्वी जनवरी से अपनी 10वीं बोर्ड परीक्षाओं पर ध्यान देंगी। रबिनारायण ने कहा कि उन्होंने तन्वी से कहा है कि अगर वह परीक्षा में फेल भी हो जाती है, तो भी कोई बड़ी बात नहीं है। उन्होंने यह भी जोर देकर कहा कि अच्छा खाना और अच्छी नींद ही सबसे अच्छा जश्न है, न कि किसी एक जीत पर अधिक ध्यान देना।

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पृष्ठभूमि

तन्वी पात्री ने कोविड-19 के दौरान 9 साल की उम्र में चीन से ओडिशा लौटकर एक साल तक अपने गृह राज्य में प्रशिक्षण लिया था। उनके पिता आईटी प्रोफेशनल हैं और वे चीनी प्रशिक्षण प्रणाली से प्रभावित हैं।

स्रोत

यह ख़बर इस स्रोत के आधार पर तैयार की गई है:

  • tv9hindi.com — मच्छर और बिना AC कमरे: तन्वी पात्री के पिता ने बताईं यूथ ओलंपिक्स की मुश्किलें

यह लेख ऊपर दिए स्रोतों के आधार पर आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस की मदद से लिखा गया है। हम कैसे काम करते हैं।

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