मध्य प्रदेश में जल जीवन मिशन के 4628 प्रोजेक्ट बिना टेंडर दिए, 1265 करोड़ की लागत
मध्य प्रदेश के लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग ने जल जीवन मिशन के अंतर्गत 4628 योजनाओं का काम बिना टेंडर के पुराने ठेकेदारों को दे दिया, जिससे कुल 1265 करोड़ रुपये का खर्च हुआ।

मध्य प्रदेश के लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (पीएचई) विभाग की जल जीवन मिशन (जेजेएम) योजना में एक बड़ा प्रशासनिक मुद्दा सामने आया है। विभाग ने 4628 रिवाइज्ड प्रोजेक्ट का काम बिना टेंडर प्रक्रिया के पुराने ठेकेदारों को सौंप दिया है। इन प्रोजेक्ट्स की कुल लागत 1265.01 करोड़ रुपये है। अधिकारियों ने केवल ठेकेदारों से सहमति पत्र लेकर वर्क ऑर्डर जारी कर दिया, जिससे विभाग की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गए हैं।
नियमों की अनदेखी और मूल्य वृद्धि
पीडब्ल्यूडी विभागीय मैनुअल के अनुसार, यदि किसी प्रोजेक्ट में 10 प्रतिशत से अधिक मूल्य वृद्धि होती है, तो नया टेंडर कराना अनिवार्य होता है। हालांकि, इन 4628 प्रोजेक्ट्स में मूल्य वृद्धि 20 से 262.62 प्रतिशत तक दर्ज की गई है। उदाहरण के लिए, सिंगरौली जिले में 133 प्रोजेक्ट्स की लागत 70 करोड़ से बढ़कर 256 करोड़ हो गई, जिसमें 262 प्रतिशत की वृद्धि आई। फिर भी, इनमें से 22 प्रोजेक्ट्स का काम बिना टेंडर के ही ठेकेदारों को सौंप दिया गया। इसी तरह, नरसिंहपुर की 245 योजनाओं में 112.97 प्रतिशत और शिवपुरी की 117 योजनाओं में 184.88 प्रतिशत मूल्य वृद्धि के बावजूद टेंडर की प्रक्रिया नहीं चलाई गई।
विभाग के अनुसार, 17 मई 2025 को शासन ने मुख्य अभियंता की अध्यक्षता में 'निविदा निराकरण समिति' का गठन किया था। इस समिति को रिवाइज्ड प्रोजेक्ट्स के अतिरिक्त कार्य की मंजूरी देने का अधिकार दिया गया था। हालांकि, आदेश में यह स्पष्ट नहीं था कि कितने प्रतिशत मूल्य वृद्धि तक समिति काम मंजूर कर सकती है। अधिकारियों ने इस आदेश की व्याख्या अपने हित में करते हुए अत्यधिक मूल्य वृद्धि वाले प्रोजेक्ट्स के लिए भी टेंडर की अनदेखी की।
विभाग के प्रमुख सचिव सचिन सिन्हा ने बताया कि शासन की स्वीकृति के बाद ही यह कार्य हुआ। उन्होंने कहा कि जिन ठेकेदारों ने काम करने में सहमति दी, उन्हें ही काम सौंपा गया, जबकि असहमत ठेकेदारों के प्रोजेक्ट्स के लिए नए टेंडर किए गए। वहीं, ईएनसी एसके अंधवान ने कहा कि निविदा निराकरण समिति ने ही यह निर्णय लिया था। पीएचई के अधीक्षण यंत्री आलोक अग्रवाल ने कहा कि डीपीआर संबंधी कार्य ईएनसी स्तर पर किए गए थे और उन्हें इस संबंध में कोई शिकायत नहीं मिली थी।
पृष्ठभूमि
जल जीवन मिशन एक केंद्र सरकार की योजना है जिसका उद्देश्य हर घर तक नल जल पहुंचाना है। मध्य प्रदेश में इस योजना के अंतर्गत कई प्रोजेक्ट्स की डीपीआर (विस्तृत परियोजना रिपोर्ट) में बदलाव हुए, जिससे लागत में वृद्धि हुई। विभाग ने इन बदलावों के बाद टेंडर प्रक्रिया को छोड़कर सीधे ठेकेदारों से सहमति लेकर काम सौंपने का रास्ता अपनाया, जिससे प्रशासनिक पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न उठे हैं।
स्रोत
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- bhaskarhindi.com — MP News: जल जीवन मिशन, बिना टेंडर, सिर्फ सहमति से ठेकेदारों को दे दिए 1265 करोड़ के 4628 प्रोजेक्ट के ठेके | Jal Jeevan Mission: Contracts worth â¹1,265 crore awarded to contractors without tenders
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