बुरहानपुर की गंफाबाई ने टमाटर खेती से बनाई आत्मनिर्भरता, 20 लोगों को रोजगार
मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले की गंफाबाई ने भाई की प्रेरणा से तीन एकड़ में टमाटर की खेती शुरू की है। उनकी इस पहल से न केवल उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है, बल्कि गांव के 15 से 20 लोगों को नियमित रोजगार भी मिल रहा है।

मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले के हथनूर गांव में निवासी गंफाबाई निवृत्ति कोली ने अपनी पारंपरिक खेती के दायरे को विस्तृत करके टमाटर की खेती में सफलता पाई है। पिछले चार वर्षों से वे लगातार इस काम में जुटी हुई हैं और अब तीन एकड़ जमीन में टमाटर का उत्पादन कर रही हैं। उनकी यह पहल क्षेत्र की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन रही है।
भाई की सलाह से बदली राह
गंफाबाई ने बताया कि शुरुआत में वे केले, मक्का और अन्य पारंपरिक फसलों की खेती करती थीं। इस दौरान उनके भाई ने उन्हें सब्जी की खेती की ओर मोड़ने के लिए प्रेरित किया। भाई ने न केवल टमाटर की खेती का सुझाव दिया, बल्कि बीज उपलब्ध कराकर इस नए काम की शुरुआत में भी मदद की। धीरे-धीरे अनुभव बढ़ने के साथ ही उनके खेत का दायरा तीन एकड़ तक पहुंच गया।
रोजगार और आत्मनिर्भरता
टमाटर की खेती एक लंबी प्रक्रिया है जिसमें खेत की तैयारी, पौधों की देखभाल, सिंचाई और निगरानी शामिल है। फसल तैयार होने में लगभग आठ महीने लगते हैं और इसके बाद चार महीने तक तुड़ाई का काम चलता है। इस प्रक्रिया के दौरान मजदूरों की ज़रूरत होती है, जिससे गंफाबाई के खेत में 15 से 20 लोगों को नियमित रूप से काम मिल रहा है।
अपनी मेहनत और लगन से गंफाबाई न केवल आत्मनिर्भर बनी हैं, बल्कि दूसरों की आजीविका में भी सहयोग कर रही हैं। उनका लक्ष्य आगे की खेती का दायरा और बढ़ाने के साथ क्षेत्र में अधिक से अधिक लोगों को रोजगार उपलब्ध कराना है।
पृष्ठभूमि
बुरहानपुर जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाएं खेती-किसानी के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बना रही हैं। गंफाबाई की यह पहल पारंपरिक खेती के साथ सब्जी उत्पादन जैसे विकल्प अपनाकर आर्थिक स्थिति मजबूत करने का एक उदाहरण है।
स्रोत
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- hindi.news18.com — एक सलाह ने बदली जिंदगी! भाई की प्रेरणा से शुरू की टमाटर की खेती, अब दूसरों को भी गंफाबाई द
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