बाइनेंस पर साइबर हमला, 6 अरब डॉलर की संपत्ति चोरी का दावा
दुनिया के सबसे बड़े क्रिप्टो एक्सचेंज बाइनेंस के डिजिटल वॉलेट में हैकर्स ने सेंध लगा दी। कंपनी ने सुरक्षा जांच के लिए जमा-निकासी सेवाएं अस्थायी रूप से बंद कर दी हैं और उत्तर कोरियाई हैकर्स पर शक जताया जा रहा है।

दुनिया के सबसे बड़े क्रिप्टो एक्सचेंज बाइनेंस (Binance) पर एक बड़े साइबर हमले की खबर सामने आई है, जिसमें करीब 6 अरब डॉलर की क्रिप्टोकरेंसी चोरी होने का दावा किया गया है। भारतीय मुद्रा में यह रकम लगभग 56 हजार करोड़ रुपये के बराबर है। पत्रकारिता के मानकों के अनुसार इसे अब तक की सबसे बड़ी क्रिप्टो चोरी माना जा रहा है। घटना के तुरंत बाद बाइनेंस ने सुरक्षा जांच के लिए पैसे जमा करने और निकालने की सुविधा अस्थायी रूप से बंद कर दी है। कंपनी का कहना है कि सभी उपयोगकर्ताओं के पैसे सुरक्षित हैं और चोरी हुई रकम की भरपाई वह अपने फंड से करेगी।
हमले की विधि और जांच की स्थिति
बाइनेंस ने गुरुवार देर रात जारी बयान में बताया कि हैकिंग की शुरुआत कंपनी के एक इंजीनियर के लैपटॉप से हुई थी। इस सुरक्षा खामोशी का फायदा उठाकर हमलावर एक सर्विस कंटेनर तक पहुंचने में सफल रहे और बिना अनुमति के ट्रांजैक्शन करके पैसे निकाले। कंपनी के सह-सीईओ रिचर्ड टेंग ने सोशल मीडिया पर स्पष्ट किया कि यह कोई साधारण या एक क्लिक वाला हमला नहीं था, बल्कि इसके पीछे कई चरणों वाली जटिल प्रक्रिया काम कर रही थी। फिलहाल, किसी एक व्यक्ति को इस हमले के लिए जिम्मेदार ठहराया नहीं गया है और यह भी नहीं पता चला कि किसी डिजिटल वॉलेट की पर्सनल चाबी लीक हुई थी।
चोरी हुई रकम को बचाने के लिए कई क्रिप्टो कंपनियां और ब्लॉकचेन लेनदेन पर नजर रखने वाली एजेंसियां एक साथ काम कर रही हैं। इस प्रयास में अब तक करीब 3 अरब डॉलर की चोरी हुई क्रिप्टोकरेंसी को फ्रीज कराया जा चुका है। ब्लॉकचेन ट्रैकर अरखाम ने संदिग्ध हैकर से जुड़े कुछ वॉलेट की पहचान की है, जिनमें करीब 5.9 अरब डॉलर की संपत्ति मौजूद है, हालांकि इस रकम की बाइनेंस से चोरी होने की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। बाइनेंस ने पुलिस और जांच कंपनियों के साथ मिलकर काम करने की बात कही है ताकि बाकी रकम का पता लगाकर उसे वापस लाया जा सके।
उत्तर कोरिया पर शक और अमेरिकी एजेंसियों की भूमिका
कई क्रिप्टो जांच कंपनियों ने इस हमले के पीछे उत्तर कोरिया के हैकिंग समूहों की भूमिका पर शक जताया है। CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, TRM Labs के पास मौजूद ऑनलाइन और ऑफलाइन सबूत इस हमले को उत्तर कोरिया की एक खास हैकिंग टीम से जोड़ते हैं। सिंगापुर की कंपनी पेंगोलिन इंटेलिजेंस ने भी ब्लॉकचेन पर हुए लेनदेन की तुलना करके इसी दिशा में आशंका जताई है। विश्लेषकों का मानना है कि हैकर्स चोरी की रकम को नकदी में बदलने के लिए मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क की मदद ले सकते हैं।
अमेरिकी जांच एजेंसियों ने भी मामले पर नजर रखनी शुरू कर दी है। FBI ने शुक्रवार को कहा कि उसे घटना की जानकारी है और वह सरकारी व निजी क्षेत्र के संगठनों के साथ मिलकर नुकसान का आकलन कर रही है। अमेरिकी सीक्रेट सर्विस के जांचकर्ता निजी कंपनियों के साथ मिलकर चोरी हुई रकम की पहचान और उसे वापस लाने की कोशिश कर रहे हैं। इस प्रक्रिया में USDC बनाने वाली कंपनी Circle भी शामिल है। बाइनेंस को उम्मीद है कि सुरक्षा जांच पूरी होने के बाद रविवार सुबह तक निकासी की सुविधा फिर शुरू हो जाएगी।
पृष्ठभूमि
बाइनेंस की स्थापना 2017 में कनाडा के नागरिक चांगपेंग झाओ ने की थी, जो एक साल के भीतर दुनिया का सबसे बड़ा क्रिप्टो ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म बन गया। झाओ ने 2023 में अमेरिका में मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े कानूनों के उल्लंघन स्वीकार करने के बाद प्रबंधन छोड़ा था और उन्हें चार महीने की जेल की सजा हुई थी, जिसे पिछले साल अक्टूबर में माफ कर दिया गया था। इससे पहले फरवरी 2025 में Bybit एक्सचेंज से 1.5 अरब डॉलर की चोरी भी हुई थी, जिसमें भी उत्तर कोरियाई हैकर्स पर आरोप लगा था।
स्रोत
यह ख़बर इन 2 स्रोतों के आधार पर तैयार की गई है:
- hindi.news18.com — क्रिप्टो दुनिया का कुबेर बना कंगाल? Binance की तिजोरी से 56 हजार करोड़ रुपये चोरी
- hindi.newsbytesapp.com — दुनिया के सबसे बड़े क्रिप्टो एक्सचेंज बाइनेंस पर साइबर हमला, 300 अरब रुपये की संपत्ति फ्रीज
यह लेख ऊपर दिए स्रोतों के आधार पर आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस की मदद से लिखा गया है। हम कैसे काम करते हैं।


