मौलाना शहाबुद्दीन रिजवी ने दिल्ली की हिंसा की निंदा की, कहा- सत्ता परिवर्तन का रास्ता सिर्फ वोट है
बरेली के मौलाना शहाबुद्दीन रिजवी ने दिल्ली में हुए हिंसक प्रदर्शनों को निंदनीय बताया और कहा कि भारत में सरकार बदलने का एकमात्र माध्यम लोकतंत्र और वोट है। उन्होंने विदेशी ताकतों के संलिप्त होने के आरोप लगाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की।

बरेली के प्रसिद्ध इस्लामी विद्वान मौलाना शहाबुद्दीन रिजवी ने दिल्ली में सत्ता परिवर्तन और तख्तापलट की मांग को लेकर हुए प्रदर्शनों की कड़ी निंदा की है। 3 नवंबर को जारी बयान में उन्होंने हिंसा को पूरी तरह गलत और निंदनीय बताया। मौलाना ने स्पष्ट किया कि भारत एक लोकतांत्रिक देश है, जहां जनता के वोट की ताकत ही सरकार बदलने का एकमात्र और वैध माध्यम है।
लोकतंत्र का संरक्षण और शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार
मौलाना रिजवी ने कहा कि शांतिपूर्ण आंदोलन, धरना और प्रदर्शन करना प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार है। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि हिंसा और तख्तापलट के नारों के जरिए सत्ता परिवर्तन की कोशिश स्वीकार नहीं की जा सकती। उन्होंने 'रिजीम चेंज' और भारत को बांग्लादेश, नेपाल या श्रीलंका जैसा बनाने वाले नारों का समर्थन नहीं करने का स्पष्ट संकेत दिया। उनके अनुसार, ऐसी मांगें भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ हैं और इनकी निंदा होनी चाहिए।
विदेशी ताकतों के संलिप्त होने का आरोप और जांच की मांग
मौलाना ने दिल्ली में हुए प्रदर्शनों के पीछे साजिश और कुछ संगठनों की भूमिका पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि हिंसक गतिविधियों के पीछे विदेशी ताकतें हो सकती हैं और कुछ लोग विदेश से आकर नारेबाजी करने के बाद वापस चले गए या खामोश हो गए। उन्होंने मांग की कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि पता चल सके कि कौन लोग देश में अशांति फैलाने और गंगा-जमुनी तहजीब को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं।
रिजवी ने ऐसे लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की भी मांग की। उन्होंने कहा कि भारत का कानून और जनता ऐसी हिंसक गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं कर सकते। देश की शांति और अमन को कमजोर करने की किसी भी कोशिश को गंभीरता से लिया जाना चाहिए, जबकि शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार सुरक्षित रहना चाहिए।
पृष्ठभूमि
यह बयान दिल्ली में सत्ता परिवर्तन और तख्तापलट की मांग को लेकर हुए प्रदर्शनों के संदर्भ में आया है। मौलाना रिजवी ने इन घटनाओं को देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ साजिश के तौर पर देखा है।
स्रोत
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