जर्मन राजदूत: ईयू-भारत एफटीए से टैरिफ घटेंगे, रोजगार बढ़ेंगे
भारत में जर्मनी के राजदूत डॉ. जैस्पर वीक का कहना है कि आने वाला यूरोपीय संघ-भारत मुक्त व्यापार समझौता दोनों देशों के बीच टैरिफ कम करेगा और आपूर्ति शृंखलाओं को मजबूत करेगा।

नई दिल्ली में जर्मनी के राजदूत डॉ. जैस्पर वीक ने हाल ही में आईएएनएस से हुई बातचीत में बताया कि भारत और जर्मनी के बीच राजनयिक संबंधों के 75 साल पूरे हो चुके हैं। उन्होंने बताया कि दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी को भी 26 वर्ष हो गए हैं। राजदूत का मानना है कि यह साझेदारी अब अपनी उम्मीदों पर खरी उतर रही है और आने वाले समय में और भी गहरी होगी।
डॉ. वीक ने कहा कि दोनों देशों के रिश्ते बहुत विविध हैं और व्यापार, निवेश, अनुसंधान, रक्षा, सुरक्षा और ऊर्जा जैसे लगभग हर महत्वपूर्ण क्षेत्र को शामिल करते हैं।
व्यापार और रोजगार पर प्रभाव
यूरोपीय संघ (ईयू) के साथ होने वाले मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को लेकर राजदूत ने बताया कि इस समझौते पर इस साल के अंत तक हस्ताक्षर होने की उम्मीद है और अगले साल की पहली छमाही में इसे लागू किया जा सकता है। डॉ. वीक के अनुसार, यह समझौता भारत और जर्मनी के व्यापार संबंधों के लिए एक बड़ा बदलाव साबित होगा। इससे कई औद्योगिक और कुछ कृषि उत्पादों पर लगने वाले शुल्क (टैरिफ) कम हो जाएंगे।
राजदूत ने बताया कि इस समझौते से दोनों देशों की आपूर्ति शृंखलाएं बेहतर तरीके से जुड़ेंगी, जिससे उत्पादन अधिक प्रतिस्पर्धी होगा। इसका लाभ न केवल भारत की अर्थव्यवस्था को मिलेगा, बल्कि सरकार के राजस्व में भी बढ़ोतरी होगी। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और आम लोगों की आर्थिक स्थिति बेहतर होगी।
ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग
ऊर्जा क्षेत्र में जर्मनी के सहयोग को लेकर डॉ. वीक ने बताया कि 'भारत-जर्मनी ऊर्जा फोरम' के 20 वर्ष पूरे होने का जश्न भी मनाया जा रहा है। यह मंच भारत को जीवाश्म ईंधन से नवीकरणीय ऊर्जा की ओर ले जाने के लिए बनाया गया था। जर्मनी ने तकनीक, विशेषज्ञता और वित्तीय सहायता के जरिए सौर ऊर्जा संयंत्रों और बिजली ग्रिड इंटीग्रेशन में भारत का समर्थन किया है।
राजदूत ने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि 2006 में भारत की नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन क्षमता 2 से 3 गीगावाट थी, जो अब करीब 300 गीगावाट तक पहुंच गई है। भविष्य में यह साझेदारी केवल ऊर्जा उत्पादन तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि भारत में सौर और पवन ऊर्जा से जुड़ी औद्योगिक क्षमताओं को विकसित करने पर भी ध्यान केंद्रित होगा। इससे भारत इन उपकरणों के उत्पादन में और अधिक आत्मनिर्भर बन सकेगा।
पृष्ठभूमि
भारत और जर्मनी के बीच राजनयिक संबंधों के 75 वर्ष और रणनीतिक साझेदारी के 26 वर्ष पूरे हो चुके हैं। दोनों देश व्यापार, रक्षा और ऊर्जा समेत कई क्षेत्रों में गहरे संबंधों को बनाए रखने की कोशिश में हैं।
स्रोत
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- punjabkesari.com — ईयू-भारत एफटीए से बदलेगा भारत-जर्मनी व्यापार, टैरिफ घटेंगे, रोजगार बढ़ेंगे: डॉ. जैस्पर वीक
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