बुधवार, 4 नवंबर 2026 हमारे बारे मेंRSSहिंदीEnglishEspañol中文عربي
फ़ेलो समाचार

देश-दुनिया की ख़बरें, कई स्रोतों से, एक जगह

देश · भूटान

भूटान नरेश ने पीएम मोदी को समर्पित किया 76वां बौद्ध स्तूप, रिजिजू ने जताया आभार

भूटान के राजा जिग्मे खेसर नामग्येल वांगचुक ने गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी में बने 108 स्तूपों में से 76वें स्तूप को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को समर्पित किया है। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने इसे भारत के लिए बड़ा सम्मान बताया।

तस्वीर: hindi.news18.com

भूटान के राजा जिग्मे खेसर नामग्येल वांगचुक ने भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक विशेष आध्यात्मिक सम्मान देते हुए गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी में निर्मित 108 बौद्ध स्तूपों में से 76वें स्तूप को उनके नाम समर्पित किया है। इस ऐतिहासिक घटनाक्रम का हिस्सा बनने के लिए भारतीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू भूटान में मौजूद थे, जहाँ उन्होंने भूटान नरेश के साथ मिलकर स्तूप पर लगी पट्टिका का अनावरण किया। यह कदम भारत और भूटान के बीच गहरे आध्यात्मिक और कूटनीतिक संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है।

'प्रोजेक्ट 108' का ऐतिहासिक निर्माण

भूटान के असम सीमा के पास स्थित गेलेफू क्षेत्र में बने इस प्रोजेक्ट का नाम 'प्रोजेक्ट 108' रखा गया है। इस परियोजना के तहत बने प्रत्येक स्तूप की ऊंचाई 15 मीटर है और एक-दूसरे से 108 मीटर की दूरी रखी गई है। ये स्तूप आई (माउ) नदी के किनारे 11.7 किलोमीटर लंबे क्षेत्र में फैले हुए हैं। भूटानी अधिकारियों के अनुसार, 76वें स्तूप का चयन विशेष रूप से इसलिए किया गया क्योंकि यह संख्या प्रधानमंत्री मोदी के 76वें जीवन वर्ष को दर्शाती है। इस स्तूप के सामने एक विशेष पट्टिका लगाई गई है जिसमें बुद्ध की प्रतिमा और सोने का शिखर सुशोभित है।

सामूहिक प्रयास और आध्यात्मिक महत्व

इस प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी विशेषता इन स्तूपों का निर्माण प्रक्रिया है। पवित्र बौद्ध त्योहार 'ल्हाबाब दुचेन' के अवसर पर, 40,000 से अधिक स्वयंसेवकों, बौद्ध भिक्षुओं और कारीगरों ने मिलकर महज 6 से 9 घंटों के भीतर इन सभी 108 स्तूपों का निर्माण और प्राण-प्रतिष्ठा पूरा कर ली। निर्माण कार्य आधी रात के बाद शुरू हुआ और दोपहर 12 बजे तक सभी स्तूप तैयार हो चुके थे। इस दौरान उपस्थित लोगों ने छह अक्षरों वाले तिब्बती बौद्ध मंत्र का एक अरब बार जाप किया। भूटान नरेश ने स्वयं स्वीकार किया कि शुरुआत में इंजीनियरों को इस कार्य की सफलता के बारे में चिंता थी, लेकिन जनता की आस्था और इच्छाशक्ति ने इसे संभव बनाया।

संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने इस अवसर पर सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए कहा कि किसी को पवित्र स्तूप समर्पित करना कोई साधारण बात नहीं है। उन्होंने इसे 'अत्यंत पुण्यकारी, शुभ और आध्यात्मिक रूप से महत्वपूर्ण कार्य' बताया। रिजिजू ने भूटान नरेश का आभार जताया और कहा कि यह स्तूप भारत और भूटान के बीच की अनूठी, आध्यात्मिक और स्थायी मित्रता का प्रतीक है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि इस समारोह के दौरान पारंपरिक वाद्ययंत्र 'डुंगचेन' भी बजाए गए, जिसने पूरे माहौल को और भी पवित्र बना दिया।

भूटान के इस कदम के पीछे भारत के लगातार सहयोग का आभार व्यक्त करना भी शामिल है। गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी को वज्रयान बौद्ध धर्म के एक वैश्विक केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है, जिसमें भारत ने बुनियादी ढांचे, कनेक्टिविटी और वित्तीय सहयोग के माध्यम से केंद्रीय भूमिका निभाई है। भूटान सरकार का मानना है कि यह स्तूप दोनों देशों की साझा सांस्कृतिक विरासत और अमर दोस्ती का स्थायी प्रतीक बनेगा।

विज्ञापन

पृष्ठभूमि

गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी (GMC) भूटान की एक महत्वाकांक्षी परियोजना है जिसका उद्देश्य इसे वज्रयान बौद्ध धर्म के एक प्रमुख वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करना है। इस परियोजना में भारत ने बुनियादी ढांचे और वित्तीय सहयोग के माध्यम से महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जिसके प्रति भूटान सरकार ने इस स्तूप समर्पण के जरिए आभार व्यक्त किया है।

स्रोत

यह ख़बर इन 3 स्रोतों के आधार पर तैयार की गई है:

  • hindi.news18.com — भूटान का PM मोदी को खास सम्मान, गेलेफू सिटी में समर्पित किया 76वां स्तूप
  • tv9hindi.com — भूटान ने PM मोदी को समर्पित किया 108 में से 76वां स्तूप, रिजिजू बोले- देश के लिए बड़ा सम्मान
  • thecsrjournal.in — पीएम मोदी को समर्पित 108 बौद्ध स्तूप का सम्मान, दुंगचेन से गूंजा भूटान

यह लेख ऊपर दिए स्रोतों के आधार पर आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस की मदद से लिखा गया है। हम कैसे काम करते हैं।

भूटाननरेंद्र मोदीकिरेन रिजिजूगेलेफू माइंडफुलनेस सिटीभारत-भूटान संबंध