इजराइल चुनाव: नेतन्याहू गठबंधन ने खोया बहुमत, अब सत्ता संघर्ष की स्थिति
इजराइल के संसदीय चुनावों में बेंजामिन नेतन्याहू के दक्षिणपंथी गठबंधन ने बहुमत खो दिया है। अब राजनीतिक अनिश्चितता का दौर शुरू हो गया है और नई सरकार बनाने के कई विकल्प खुल गए हैं।

इजराइल में हाल ही में हुए संसदीय चुनावों के परिणामों ने देश की राजनीतिक परिदृश्य को अस्थिर कर दिया है। चुनाव के नतीजों के अनुसार, प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के नेतृत्व वाली लिकुड पार्टी और उनके सहयोगी दलों का गठबंधन बहुमत खो बैठा है। इसका मतलब यह है कि विपक्षी दलों को यदि एकजुट होना होगा तो उनके पास स्पष्ट बहुमत उपलब्ध है। इस स्थिति ने इजराइल में नई सरकार गठन के लिए जटिल राजनीतिक गणित को जन्म दिया है।
चुनाव में एक उल्लेखनीय बदलाव यह रहा कि दो अरब पार्टियों के गठबंधनों 'राम' और 'द ज्वाइंट लिस्ट' ने उम्मीदों से बेहतर प्रदर्शन किया। इन दोनों गठबंधनों ने मिलकर 19 सीटें जीत लीं, जिससे वे सत्ता में शामिल होने की स्थिति में अहम भूमिका निभाने के लिए तैयार हो गए हैं। इसी के साथ, नेतन्याहू के प्रमुख प्रतिद्वंद्वी और पूर्व सेना प्रमुख गादी आइजनकोट के गठबंधन को 48 सीटें मिली हैं।
नेतन्याहू के सामने राजनीतिक विकल्प
अब सवाल यह है कि नेतन्याहू सत्ता में बने रहने के लिए क्या रणनीति अपनाते हैं। नेतन्याहू ने स्पष्ट किया है कि वे देश की सुरक्षा के नाम पर एक दक्षिणपंथी सरकार बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं और किसी भी कीमत पर अरब दलों के समर्थन से बनी सरकार का विरोध करेंगे। उनके सामने एक संभावित विकल्प राष्ट्रीय एकता सरकार का प्रस्ताव रखना है, जिसमें पूर्व सेना प्रमुख गादी आइजनकोट के साथ प्रधानमंत्री पद के लिए रोटेशन का फार्मूला अपनाया जा सकता है। इस समझौते में आधे समय नेतन्याहू और बाकी आधे कार्यकाल आइजनकोट प्रधानमंत्री रह सकते हैं।
यदि यह समझौता संभव होता है, तो नेतन्याहू अपने कट्टर दक्षिणपंथी सहयोगियों की ब्लैकमेलिंग से मुक्त हो सकते हैं और अरब दलों को सत्ता से बाहर रखने में सफल हो सकते हैं। हालांकि, नेतन्याहू के पास एक और रास्ता भी है, जो कि विपक्षी खेमे में सेंध मारना है। बहुमत के जादुई आंकड़े यानी 61 सीटों से कुछ ही कदम दूर होने की स्थिति में, यदि वे 2 से 4 असंतुष्ट सांसदों को अपने पाले में ला लेते हैं, तो उनका गठबंधन फिर से बहुमत प्राप्त कर सकता है। यह रास्ता नैतिक रूप से विवादास्पद माना जा सकता है, लेकिन इजराइली राजनीति में ऐसा चलन नया नहीं है।
सभी राजनीतिक बातचीत विफल होने की स्थिति में, नेतन्याहू लंबे समय तक कार्यवाहक प्रधानमंत्री की हैसियत से देश की कमान संभाल सकते हैं। इजराइली नियमों के अनुसार, नई सरकार बनने तक पुरानी सरकार कार्यवाहक रूप में काम करती है। यह स्थिति नेतन्याहू को जनता के बीच अपनी जमीन मजबूत करने और विपक्ष में फूट डालने का मौका देगी। इस बीच, नेतन्याहू ने अरब दलों पर वोट चोरी और गड़बड़ियों के आरोप लगाए हैं, जिन्हें संबंधित दलों ने खारिज कर दिया है। आने वाले दिनों में इजराइल के राजनीतिक परिदृश्य में उथल-पुथल जारी रहने की संभावना है।
पृष्ठभूमि
चुनाव परिणामों ने इजराइली समाज में गहरी दरारों को उजागर किया है। नेतन्याहू का मुख्य वादा सुरक्षा की गारंटी रहा है, हालांकि 7 अक्टूबर के हमले की जिम्मेदारी लेने से वे इनकार कर रहे हैं। गाजा में उनके युद्ध के कारण 70,000 से अधिक फिलिस्तीनी मारे गए हैं, जिनमें 20,000 बच्चे शामिल हैं।
स्रोत
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- punjabkesari.com — इजराइल का जटिल परिदृश्य
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