कोयंबटूर में ईशा के मॉडल फार्म पर हुई मिट्टी विज्ञान की अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला
सॉइल फूड वेब स्कूल ने भारत में पहली बार ईशा के 'सेव सॉइल' मॉडल फार्म पर मिट्टी के जीव विज्ञान पर प्रशिक्षण का आयोजन किया। 10 देशों के 46 प्रतिभागियों ने जैविक खेती की तकनीकों का अभ्यास किया।

कोयंबटूर स्थित ईशा के 'सेव सॉइल रीजनरेटिव रिवोल्यूशन' मॉडल फार्म पर हाल ही में मिट्टी के जीव विज्ञान से जुड़ी एक अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह 'सॉइल फूड वेब स्कूल' (SFW) की भारत में आयोजित पहली कार्यशाला थी। इस वैश्विक संगठन का उद्देश्य मिट्टी के पारिस्थितिकी तंत्र को बहाल करने के लिए किसानों और पर्यावरणविदों को प्रशिक्षित करना है।
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में 10 देशों और भारत के 7 राज्यों के कुल 46 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। प्रतिभागियों में किसान, कृषि सलाहकार, माइक्रोबायोलॉजिस्ट, एनजीओ नेता और मृदा वैज्ञानिक शामिल थे। इन देशों में नीदरलैंड, ऑस्ट्रेलिया, ईरान, संयुक्त राज्य अमेरिका और कोस्टा रिका भी शामिल थे।
प्रशिक्षण की मुख्य विशेषताएं
कार्यशाला का आयोजन दो चरणों में किया गया। 16-17 अक्टूबर को आयोजित दो दिवसीय सेमिनार में 61 प्रतिभागियों को मिट्टी में रहने वाले सूक्ष्मजीवों की भूमिका के बारे में बुनियादी जानकारी दी गई। इसके बाद 19 से 30 अक्टूबर तक चली 10 दिवसीय कार्यशाला में प्रतिभागियों को 'बायोकम्प्लीट' कंपोस्ट बनाने की व्यावहारिक ट्रेनिंग दी गई। इसमें जैविक सामग्री का चयन, मिश्रण तैयार करना और खाद के ढेरों में नमी व हवा का नियंत्रण करना सीखाया गया।
प्रशिक्षण के दौरान माइक्रोस्कोप का उपयोग करके मिट्टी और खाद के नमूनों की जांच की गई ताकि सूक्ष्मजीवों की पहचान की जा सके। प्रतिभागियों ने कंपोस्ट अर्क और कंपोस्ट चाय जैसी जैविक तरल खाद तैयार करने के तरीके भी सीखे। सॉइल फूड वेब फाउंडेशन के कार्यकारी निदेशक इवान बकमैन ने बताया कि ईशा के मॉडल फार्म का जमीनी स्तर पर काम इस सहयोग की मुख्य वजह बना।
सॉइल फूड वेब स्कूल की एडवांस्ड एजुकेशन डायरेक्टर लॉयडा ने कहा कि विभिन्न प्रकार की खाद बनाने की प्रक्रिया पर एक साथ काम करने से प्रतिभागियों को समझ आया कि अलग-अलग परिस्थितियों में मिट्टी का व्यवहार कैसे बदलता है। इन प्रतिभागियों की उम्मीद है कि वे इन तकनीकों को अपने-अपने देशों और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार लागू करेंगे।
पृष्ठभूमि
ईशा द्वारा शुरू किया गया 'सेव सॉइल' आंदोलन मिट्टी के संरक्षण पर केंद्रित है। इसका हिस्सा बने मॉडल फार्म पेड़ों पर आधारित प्राकृतिक खेती के तरीकों का परीक्षण करते हैं ताकि मिट्टी में जैविक तत्व वापस लाए जा सकें और खेती को लाभदायक बनाया जा सके।
स्रोत
यह ख़बर इस स्रोत के आधार पर तैयार की गई है:
- tv9hindi.com — ईशा के 'सेव सॉइल' मॉडल फार्म पर इंटरनेशनल वर्कशॉप, 10 देशों के 46 प्रतिभागियों ने ली जैविक खेती की ट्रेनिंग
यह लेख ऊपर दिए स्रोतों के आधार पर आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस की मदद से लिखा गया है। हम कैसे काम करते हैं।


