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राजनीति · उत्तर प्रदेश

यूपी चुनाव से पहले भाजपा ने मुरली मनोहर जोशी को राज्य समिति में शामिल किया

उत्तर प्रदेश में ब्राह्मण वोटों को लेकर चिंता के बीच, बीजेपी ने 92 वर्षीय मुरली मनोहर जोशी को राज्य कार्यसमिति का स्थायी आमंत्रित सदस्य नियुक्त किया है।

तस्वीर: punjabkesari.com

उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अपने वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी को राजनीतिक परिदृश्य में वापस लाने का फैसला लिया है। पार्टी ने उन्हें नई राज्य कार्यसमिति में 'स्थायी आमंत्रित सदस्य' की जिम्मेदारी सौंपी है। यह समिति अगले साल होने वाले चुनावों की तैयारी और देखरेख का कार्य करेगी। यह नियुक्ति ऐसे समय में की गई है जब पार्टी को ब्राह्मण समुदाय के बीच बढ़ते असंतोष की चिंता है।

ब्राह्मण वोटों पर चिंता

स्रोतों के अनुसार, 1980 के दशक के अंत में राम मंदिर आंदोलन के बाद से ब्राह्मण समुदाय भाजपा का एक प्रमुख वोट बैंक रहा है। हालांकि, आंतरिक रिपोर्ट्स बताती हैं कि राम मंदिर निर्माण के लिए दिए गए चंदे में हुए गड़बड़ी के आरोपों ने समुदाय में नाराजगी पैदा की है। इसके अलावा, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्यकाल में ठाकुर समुदाय के प्रभाव में वृद्धि के कारण ब्राह्मण नेताओं को लग रहा है कि उनकी उपेक्षा हो रही है। जोशी का इस समिति में शामिल होना इसी असंतोष को दूर करने और समुदाय को संभालने की एक रणनीति माना जा रहा है।

मुरली मनोहर जोशी को 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यभार संभालने के तुरंत बाद 'मार्गदर्शक मंडल' में भेज दिया गया था, जिससे वे राजनीतिक रूप से हाशिए पर आ गए थे। पिछले 12 वर्षों से वे लगभग निष्क्रिय थे। अब 92 वर्ष की उम्र में उनकी वापसी यह संकेत देती है कि आरएसएस, जिससे जोशी हमेशा से निकटता रखते रहे हैं, यूपी की चुनावी रणनीति में सक्रिय भूमिका निभा रहा है।

दूसरी ओर, इस समिति में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का नाम नहीं है, जो उत्तर भारत में पार्टी की चुनावी मशीनरी के लिए जिम्मेदार माने जाते हैं। समिति में प्रधानमंत्री मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह शामिल हैं। विश्लेषकों का मानना है कि अमित शाह को बाहर रखकर पार्टी यह संदेश देना चाहती है कि यूपी में कमान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हाथ में है, जिससे स्थानीय मतदाताओं में विश्वास का माहौल बनाया जा सके।

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पृष्ठभूमि

मुरली मनोहर जोशी 2014 के बाद से पार्टी के 'मार्गदर्शक मंडल' में थे और राजनीतिक गतिविधियों से दूर थे। यूपी में आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर पार्टी ने अपने वरिष्ठ नेताओं को फिर से सक्रिय करने की रणनीति अपनाई है।

स्रोत

यह ख़बर इस स्रोत के आधार पर तैयार की गई है:

  • punjabkesari.com — यूपी में ब्राहम्णों को मनाने के लिये भाजपा को ‘मुरली’ का सहारा

यह लेख ऊपर दिए स्रोतों के आधार पर आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस की मदद से लिखा गया है। हम कैसे काम करते हैं।

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