कोच्चि में अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी: उपग्रह तकनीक से समुद्री मछलियों की निगरानी
कोच्चि में शुरू हुई तीन दिवसीय 'ट्रेवर-सफारी' संगोष्ठी में 30 से अधिक देशों के वैज्ञानिक समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र की निगरानी के लिए सैटेलाइट तकनीक के उपयोग पर चर्चा करेंगे।

कोच्चि, 2 नवंबर: बदलते जलवायु पैटर्न और महासागरों में हो रहे बदलावों के बीच, मछलियों के वितरण को समझने और समुद्री संसाधनों की रक्षा के लिए वैज्ञानिक अब उपग्रह तकनीक पर निर्भर कर रहे हैं। बुधवार को कोच्चि में आईसीएआर-सेंट्रल मरीन फिशरीज रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीएमएफआरआई) में आयोजित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी 'ट्रेवर-सफारी' का उद्घाटन हुआ। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र की निगरानी के लिए आधुनिक तकनीकों, विशेष रूप से रिमोट सेंसिंग और सैटेलाइट डेटा के उपयोग पर चर्चा करना है।
संगोष्ठी में 30 से अधिक देशों के वैज्ञानिक भाग ले रहे हैं, जिनमें 80 से अधिक विदेशी प्रतिनिधियों की उपस्थिति की उम्मीद है। इन विशेषज्ञों का मानना है कि सैटेलाइट डेटा समुद्र के तापमान, उत्पादकता और मछलियों के स्थानांतरण को ट्रैक करने में सहायक हो सकता है। यह जानकारी तटीय समुदायों और मछुआरों के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे उन्हें संभावित मछली पकड़ने वाले क्षेत्रों की पहचान करने और अपनी यात्राओं की बेहतर योजना बनाने में मदद मिलती है।
जलवायु परिवर्तन और मत्स्य पालन पर प्रभाव
इस बैठक में जलवायु परिवर्तन, बदलते मानसून और चरम मौसम की घटनाओं के मछलियों की आबादी पर प्रभाव का भी गहन विश्लेषण किया जा रहा है। वैज्ञानिकों का कहना है कि महासागर की स्थितियों और पानी की गुणवत्ता में होने वाले बदलाव न केवल मछलियों की उपलब्धता को प्रभावित करते हैं, बल्कि तटीय समुदायों की आजीविका के लिए भी गंभीर खतरा बन सकते हैं। इस संदर्भ में, मत्स्य पालन को अधिक टिकाऊ बनाने और समुद्री जैव विविधता की रक्षा के नए तरीकों पर विचार-विमर्श किया जा रहा है।
संगोष्ठी में पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक विज्ञान के एकीकरण पर भी बहस होगी। मछली पकड़ने वाले समुदायों के अनुभवों को वैज्ञानिक डेटा के साथ जोड़ने के माध्यम से प्रभावी नीतियां बनाई जा सकती हैं। इसके अलावा, मत्स्य पालन क्षेत्र में महिलाओं और हाशिए पर रहने वाले समुदायों की भूमिका को भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। बायोटेक्नोलॉजी विभाग के सहयोग से आयोजित विशेष सत्र में 'वन हेल्थ' दृष्टिकोण को अपनाया जाएगा, जिसमें पर्यावरणीय स्वास्थ्य को मानव और पशु स्वास्थ्य से जोड़ा जाएगा।
सीएमएफआरआई के निदेशक डॉ. ग्रिनसन जॉर्ज ने बताया कि इन चर्चाओं का मूल उद्देश्य महासागर की स्थितियों को बेहतर ढंग से समझना और पर्यावरणीय निगरानी में सुधार लाना है। उनका कहना है कि इससे सुरक्षित मत्स्य पालन, टिकाऊ संसाधन प्रबंधन, सीफूड सुरक्षा और तटीय समुदायों की दीर्घकालिक आजीविका की भलाई सुनिश्चित की जा सकेगी। इस कार्यक्रम के दौरान 'बे ऑफ बंगाल नेटवर्क ऑफ ओशन रिसर्चर्स फॉर फिशरीज' की भी शुरुआत की जाएगी, जिसका लक्ष्य इस क्षेत्र के वैज्ञानिकों के बीच सहयोग को बढ़ावा देना है।
पृष्ठभूमि
संगोष्ठी का आयोजन कोचीन यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी के केमिकल ओशनोग्राफी विभाग, ट्रेवर प्लैट साइंस फाउंडेशन, सीएमएफआरआई और मरीन बायोलॉजिकल एसोसिएशन ऑफ इंडिया के संयुक्त प्रयासों से किया जा रहा है।
स्रोत
यह ख़बर इन 2 स्रोतों के आधार पर तैयार की गई है:
- punjabkesari.com — महासागरों में बढ़ते बदलाव के बीच मछलियों की निगरानी के लिए वैज्ञानिक अब उपग्रह तकनीक की लेंगे मदद
- bhaskarhindi.com — महासागरों में बढ़ते बदलाव के बीच मछलियों की निगरानी के लिए वैज्ञानिक अब उपग्रह तकनीक की लेंगे मदद | sea tunnel, fish,
यह लेख ऊपर दिए स्रोतों के आधार पर आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस की मदद से लिखा गया है। हम कैसे काम करते हैं।
