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पाकिस्तान की उच्च शिक्षा व्यवस्था वित्तीय संकट में, रिपोर्ट में उठे गंभीर सवाल

पाकिस्तानी अखबार 'डॉन' की रिपोर्ट के अनुसार, 2002 में शुरू किए गए सुधारों के बावजूद देश के विश्वविद्यालय बढ़ते कर्ज और कमजोर शैक्षणिक परिणामों से जूझ रहे हैं।

तस्वीर: punjabkesari.com

पाकिस्तान की उच्च शिक्षा व्यवस्था गंभीर संकट का सामना कर रही है, जहां भारी निवेश के बावजूद संस्थान अपने लक्ष्यों को हासिल करने में असफल रहे हैं। पाकिस्तानी अखबार 'डॉन' की एक विस्तृत रिपोर्ट में बताया गया है कि करीब दो दशक पहले तत्कालीन राष्ट्रपति जनरल परवेज मुशर्रफ द्वारा शुरू किए गए सुधार अब असफलता की तस्वीर पेश कर रहे हैं। इन सुधारों का मूल उद्देश्य कॉलेजों और विश्वविद्यालयों को 'उत्कृष्टता के केंद्र' के रूप में विकसित करना था, लेकिन वर्तमान स्थिति यह दर्शाती है कि यह मकसद प्राप्त नहीं हो सका।

रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान में अब लगभग 280 विश्वविद्यालय कार्यरत हैं जहां लाखों छात्र शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। हालांकि, शोध कार्यों की संख्या बढ़ने के बावजूद, इन संस्थानों की गुणवत्ता और शैक्षणिक परिणाम कमजोर बने हुए हैं। विश्वविद्यालय लगातार बढ़ते कर्ज और शोध की गुणवत्ता को लेकर उठ रहे सवालों से परेशान हैं, जिससे इनका नियमित संचालन मुश्किल हो गया है।

वित्तीय संकट और विस्तार का बोझ

नए विश्वविद्यालयों की स्थापना पर अरबों रुपये खर्च किए गए थे और अमेरिका के साथ समझौते के तहत 'फुलब्राइट छात्रवृत्ति कार्यक्रम' जैसे बड़े प्रयास किए गए, लेकिन अपेक्षित परिणाम नहीं मिले। रिपोर्ट में चिंता जताई गई है कि विश्वविद्यालयों की तेजी से बढ़ती संख्या अब अपने ही बोझ तले दब रही है। यह समस्या राष्ट्रीय स्तर पर तब और गंभीर हो गई जब खैबर पख्तूनख्वा के लगभग सभी सरकारी विश्वविद्यालय गंभीर वित्तीय संकट की चपेट में आ गए। इन संस्थानों ने अपनी स्थिति सुधारने के लिए लगभग 25 अरब पाकिस्तानी रुपए के विशेष पैकेज की मांग की है।

रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि 2002 में शुरू किए गए सुधार अब जटिल और खतरनाक रूप ले चुके हैं। यह व्यवस्था इतनी बड़ी हो चुकी है कि इसे विफल होने नहीं दिया जा सकता, लेकिन इसमें सुधार करना भी बेहद मुश्किल हो गया है। विशेषज्ञों ने शुरुआत में ही 2002 की 'टास्क फोर्स' रिपोर्ट में इन संभावित समस्याओं के बारे में चेतावनी दी थी, जो बाद में उच्च शिक्षा आयोग (एचईसी) की स्थापना का आधार बनी थी।

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पृष्ठभूमि

पाकिस्तान में 2002 में उच्च शिक्षा क्षेत्र में सुधार लाने के लिए एक विशेष 'टास्क फोर्स' रिपोर्ट तैयार की गई थी, जिसके आधार पर उच्च शिक्षा आयोग (एचईसी) की स्थापना हुई थी। इस योजना का लक्ष्य देश को ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था में बदलना था, जिसके लिए अमेरिका के साथ सहयोग समझौते भी किए गए थे।

स्रोत

यह ख़बर इन 2 स्रोतों के आधार पर तैयार की गई है:

  • punjabkesari.com — भारी निवेश के बावजूद पटरी से उतरी पाकिस्तान की उच्च शिक्षा व्यवस्था : रिपोर्ट
  • bhaskarhindi.com — भारी निवेश के बावजूद पटरी से उतरी पाकिस्तान की उच्च शिक्षा व्यवस्था रिपोर्ट | Pakistan's higher education in shambles, crisis looms large over its future: Report

यह लेख ऊपर दिए स्रोतों के आधार पर आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस की मदद से लिखा गया है। हम कैसे काम करते हैं।

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