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कराची में मोहता पैलेस का इतिहास: जिन्नाह से लेकर संग्रहालय तक

पाकिस्तान के कराची स्थित मोहता पैलेस, जिसे अब कस्र-ए-फातिमा कहा जाता है, का विस्तृत इतिहास। यह इमारत एक मारवाड़ी सेठ का आलीशान निवास थी, जिसे बाद में पाकिस्तान सरकार ने अपने कब्जे में लिया और संग्रहालय में बदला।

तस्वीर: punjabkesari.com

पाकिस्तान के कराची शहर के क्लिफ्टन इलाके में स्थित एक ऐतिहासिक इमारत, जिसे आज 'कस्र-ए-फातिमा' के नाम से जाना जाता है, वास्तव में एक भारतीय मूल के मारवाड़ी परिवार की संपत्ति थी। यह इमारत मूल रूप से 'मोहता पैलेस' कहलाती थी और इसकी मालिकाना हक बीकानेरी मूल के सेठ शिव रतन मोहता का था। यह भव्य महल 1927 में निर्मित हुआ था और इसे समुद्र तट के पास स्थित इस समृद्ध इलाके की सबसे प्रमुख वास्तुकलात्मक संरचनाओं में से एक माना जाता है।

मोहता परिवार की विरासत और महल का निर्माण

मोहता परिवार का इतिहास 19वीं सदी तक जाता है। परिवार के पूर्वज मोतीलाल मोहता 1842 में बीकानेर से हैदराबाद चले गए थे, जहां से उनके चार बच्चे कलकत्ता पहुंचे। इनमें से गोवर्धन मोहता 1883 में कराची आ गए। उनके बड़े बेटे रामगोपाल, जो एक विद्वान और लेखक थे, ने इस इमारत के निर्माण में अहम भूमिका निभाई। इसी योगदान को देखते हुए इसे आधिकारिक तौर पर 'सेठ रामगोपाल गोवर्धन दास मोहता हिंदू जिमखाना' नाम दिया गया था। शिव रतन मोहता, जो एक सफल उद्योगपति थे और 'पाम-ऑलिव' साबुन के निर्माण से अमीर बने, ने इस महल को अपने ग्रीष्मकालीन आवास के रूप में बनवाया था।

यह महल 18,500 वर्ग फुट के क्षेत्र में फैला हुआ है और इसे इंडो-सारासेनिक शैली में बनाया गया है। निर्माण में राजस्थान की परंपरा का पालन करते हुए जोधपुर के गुलाबी पत्थरों और पास के गिजरी इलाके के पीले पत्थरों का प्रयोग किया गया है। इमारत पूरी तरह सागौन की लकड़ी से बनी है, जिसमें पॉलिश की गई सीढ़ियां, लंबे गलियारे और जटिल नक्काशीदार दरवाजे शामिल हैं। महल में कुल नौ गुंबद हैं, जिनमें से एक केंद्र में स्थित है। बाहरी दीवारों को खिड़कियों, मेहराबों, गुंबदों और फूलों के डिज़ाइन वाली रेलिंग से सजाया गया है।

महल की वास्तुकला में कई अनोखी विशेषताएं हैं। निचली मंजिल पर मनोरंजन के लिए बड़े कमरे हैं, जबकि पहली मंजिल अधिक निजी उपयोग के लिए थी। छत (टेरेस) पर छाया की व्यवस्था की गई थी ताकि तेज धूप से बचा जा सके। इमारत के उत्तरी हिस्से में एक बेसमेंट था, जिसमें गर्म पानी का पूल और चेंजिंग रूम था। कहा जाता है कि वहां गर्म और ठंडे पानी की व्यवस्था थी। महल की छत पर एक पारिवारिक मंदिर भी था, जो भगवान शिव को समर्पित था।

विभाजन के बाद कब्जा और संग्रहालय में रूपांतरण

अगस्त 1947 में भारत के विभाजन के दौरान कराची में हालात बिगड़ने लगे। सुरक्षा कारणों और घरेलू दबाव के चलते सेठ शिव रतन मोहता को रातों-रात अपना महल छोड़कर मुंबई (तब बॉम्बे) आना पड़ा। उनके जाने के बाद पाकिस्तान सरकार ने इस संपत्ति पर कब्जा कर लिया। शुरुआत में यहां पाकिस्तान का विदेश मंत्रालय स्थापित किया गया। 1964 में, यह इमारत मुहम्मद अली जिन्ना की बहन फातिमा जिन्ना का आधिकारिक निवास बन गई। 1960 के दशक में, यह इमारत राष्ट्रपति अयूब खान के खिलाफ फातिमा जिन्ना के चुनाव अभियान का मुख्य केंद्र भी रही।

फातिमा जिन्ना की मृत्यु के बाद, उनकी दूसरी बहन शिरीन जिन्ना यहां रहने आईं और 1980 में उनके निधन तक भूतल पर रहीं। इसके बाद महल को सील कर दिया गया। 1995 में, सिंध सरकार ने इस संपत्ति को खरीदा ताकि इसे पाकिस्तान की कलाओं के लिए एक संग्रहालय में बदला जा सके। सरकार ने इस संपत्ति के प्रबंधन के लिए एक ट्रस्ट बनाया और गवर्नर की अध्यक्षता में ट्रस्टियों का बोर्ड गठित किया, ताकि यह सुनिश्चित हो कि इमारत को बेचा न जाए और इसे व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए न इस्तेमाल किया जाए।

आज यह महल सिंध सरकार के अधीन एक प्रसिद्ध संग्रहालय और सांस्कृतिक केंद्र के रूप में कार्य करता है। हाल ही में फरवरी 2024 में, शिव रतन मोहता के परपोते सात्विक मोहता ने कराची का दौरा किया और अपने परदादा द्वारा बनवाए गए इस ऐतिहासिक स्थल का निरीक्षण किया। वर्तमान में मोहता परिवार के वंशज मुंबई और अन्य देशों में रहते हैं, लेकिन यह इमारत अब पाकिस्तान के सांस्कृतिक इतिहास का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है।

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पृष्ठभूमि

मोहता पैलेस का इतिहास भारत-पाकिस्तान विभाजन के दौरान हुई संपत्ति के हस्तांतरण और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण को दर्शाता है। यह इमारत अब पाकिस्तान के लिए एक प्रतीकात्मक स्थल है, हालांकि इसकी मूल मालिकाना हक एक भारतीय मूल के परिवार की थी।

स्रोत

यह ख़बर इस स्रोत के आधार पर तैयार की गई है:

  • punjabkesari.com — कराची के मोहता-पैलेस पर जिन्नाह का कब्जा

यह लेख ऊपर दिए स्रोतों के आधार पर आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस की मदद से लिखा गया है। हम कैसे काम करते हैं।

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