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दिशा सालियान केस: जांच पर कोर्ट की निगरानी की मांग, 18 नवंबर को होगी सुनवाई

दिशा सालियान की मौत के मामले में जांच की धीमी गति को लेकर वकील ने किला कोर्ट में सीबीआई की कार्रवाई पर अदालत की निगरानी की मांग की है। अगली सुनवाई 18 नवंबर को निर्धारित की गई है।

तस्वीर: punjabkesari.com

मुंबई में दिशा सालियान की मौत से जुड़े मामले में जांच प्रक्रिया की गति को लेकर नए सवाल उठे हैं। दिशा के वकील नीलेश ओझा ने बताया कि जांच में तेजी लाने और केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की कार्रवाई को अदालत की निगरानी में रखने के लिए किला कोर्ट में एक आवेदन दाखिल किया गया है। इस आवेदन पर अगली सुनवाई 18 नवंबर को तय की गई है।

जांच की धीमी गति पर सवाल

वकील ओझा ने दावा किया कि सीबीआई की कार्रवाई में देरी देखी जा रही है, जिसके चलते अदालत की निगरानी की मांग की गई है। उनकी मांग है कि जांच एजेंसी को अपनी प्रगति और कार्रवाई की जानकारी नियमित रूप से अदालत को देनी चाहिए। इस प्रक्रिया के तहत सीबीआई को अदालत में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करनी होगी। ओझा ने कहा कि यदि जांच में कोई कमी पाई जाती है, तो अदालत सीबीआई को कानून, मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) और सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुसार कार्रवाई करने का निर्देश दे सकती है।

ओझा ने उल्लेख किया कि अब तक जांच में कुछ महत्वपूर्ण कदम नहीं उठाए गए हैं। इनमें आदित्य ठाकरे की गिरफ्तारी नहीं होना और उनके पक्ष की ओर से बताए गए गवाहों के बयान दर्ज नहीं किए जाना शामिल है। उन्होंने दावा किया कि प्रत्यक्षदर्शियों के नाम दिए गए हैं और सीबीआई के पास 11 प्रत्यक्षदर्शी हैं, लेकिन अब तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है।

सांसदों और राष्ट्रपति को पत्र

दिशा सालियान के पिता सतीश सालियान ने देशभर के सांसदों और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को पत्र लिखा है। पत्र में उनसे इस मुद्दे को संसद के भीतर और बाहर उठाने की अपील की गई है। सतीश सालियान ने पत्र में सवाल किया है कि जब मामले में कथित सामूहिक दुष्कर्म और हत्या से जुड़े साक्ष्य मौजूद होने का दावा किया जा रहा है, तो प्रभावशाली आरोपियों की गिरफ्तारी में देरी क्यों हो रही है। उन्होंने आम नागरिकों और कथित हाई-प्रोफाइल आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की गति में अंतर होने का आरोप भी लगाया।

वकील ने दावा किया कि हाई कोर्ट के आदेश में ऐसे तथ्य दिए गए हैं, जिन्हें उन्होंने 'मिनी चार्जशीट' बताया। उनका कहना है कि उस आदेश के आधार पर करीब 30 लोगों की गिरफ्तारी हो जानी चाहिए थी। सतीश सालियान ने बाद में पेन ड्राइव, गवाहों के वीडियो में रिकॉर्ड किए गए बयान और अन्य साक्ष्य भी उपलब्ध कराए। ओझा ने देशभर के लोगों से सीबीआई कार्यालय तक मार्च में शामिल होने की अपील की है, ताकि एजेंसी से सवाल किया जा सके कि कथित साक्ष्य और गवाहों की जानकारी होने के बावजूद आदित्य ठाकरे और अन्य आरोपियों के खिलाफ गिरफ्तारी की कार्रवाई क्यों नहीं की गई।

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पृष्ठभूमि

दिशा सालियान की मौत के मामले में जांच सीबीआई को सौंपी गई है। पिछले कुछ समय से परिवार और वकील जांच की गति और आरोपियों, विशेष रूप से आदित्य ठाकरे, की गिरफ्तारी को लेकर सवालिया नजर में हैं।

स्रोत

यह ख़बर इन 2 स्रोतों के आधार पर तैयार की गई है:

  • punjabkesari.com — दिशा सालियान केस: कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग को लेकर याचिका दाखिल, 18 नवंबर को सुनवाई
  • bhaskarhindi.com — दिशा सालियान केस कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग को लेकर याचिका दाखिल, 18 नवंबर को सुनवाई | ???? ??????? ???: ????? ?? ??????? ??? ???? ?? ???? ?? ???? ?????? ?????, 18 ????? ?? ??????

यह लेख ऊपर दिए स्रोतों के आधार पर आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस की मदद से लिखा गया है। हम कैसे काम करते हैं।

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