कैबिनेट ने 50,655 करोड़ रुपये की हाई-स्पीड कॉरिडोर परियोजनाओं को दी मंजूरी
केंद्रीय मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति ने 8 नेशनल हाई-स्पीड कॉरिडोरों के निर्माण को हरी झंडी दिखाई है, जिससे उत्तर भारत के प्रमुख शहरों और तीर्थ स्थलों के बीच यात्रा समय में भारी कमी आएगी।

केंद्रीय मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति ने हाल ही में 936 किलोमीटर लंबे 8 नेशनल हाई-स्पीड कॉरिडोरों के निर्माण को मंजूरी दे दी है। इस महत्वाकांक्षी योजना की कुल लागत 50,655 करोड़ रुपये अनुमानित है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट के इस फैसले की जानकारी देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में यह निर्णय लिया गया है। इस परियोजना का उद्देश्य देश के आर्थिक, सामाजिक और बुनियादी ढांचे को मजबूत करना है।
आगरा-ग्वालियर और पश्चिम बंगाल के लिए नए एक्सप्रेसवे
इस मंजूरी के तहत 88 किलोमीटर लंबे आगरा-ग्वालियर ग्रीनफील्ड हाईवे को 6-लेन कॉरिडोर के रूप में विकसित किया जाएगा। इस परियोजना की लागत 4,613 करोड़ रुपये होगी। यह हाईवे उत्तर प्रदेश के ताजमहल और आगरा किला, तथा मध्य प्रदेश के ग्वालियर किला जैसे प्रमुख पर्यटन स्थलों को बेहतर ढंग से जोड़ेगा। अनुमान है कि इससे आगरा और ग्वालियर के बीच की दूरी 7 प्रतिशत और यात्रा समय 50 प्रतिशत तक कम हो जाएगा। यह हाईवे उत्तर प्रदेश, राजस्थान और मध्य प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्रों से गुजरेगा।
इसके अलावा, पश्चिम बंगाल में खड़गपुर और मोरेग्राम के बीच 231 किलोमीटर लंबे 4-लेन एक्सेस-कंट्रोल हाई-स्पीड कॉरिडोर को भी मंजूरी मिली है। इसकी लागत 10,247 करोड़ रुपये होगी। यह कॉरिडोर पश्चिम बंगाल, ओडिशा और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों को देश के उत्तर-पूर्वी हिस्से से बेहतर संपर्क प्रदान करेगा। वर्तमान में मालवाहक वाहनों के लिए इस रूट पर 9 से 10 घंटे लगते हैं, जो नए हाईवे के साथ घटकर 3 से 5 घंटे रह जाएगा।
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने वाराणसी से नई दिल्ली के बीच वंदे भारत स्लीपर एक्सप्रेस को भी हरी झंडी दिखाई है। इस परियोजना से दिल्ली से आगरा तक की यात्रा केवल 59 मिनट में, कानपुर तक 1 घंटे 45 मिनट में और लखनऊ तक करीब 2 घंटे 12 मिनट में हो जाएगी। दिल्ली से वाराणसी की यात्रा लगभग 3 घंटे 33 मिनट की होगी। यह कॉरिडोर दिल्ली से शुरू होकर आगरा, कानपुर, नोएडा, अयोध्या, वाराणसी, देहरादून और पटना से सिलीगुड़ी तक जाएगा।
विश्व स्तर के अध्ययनों के अनुसार, 2 घंटे से कम की यात्राओं में हाई-स्पीड ट्रेन बाजार का 90 फीसद हिस्सा हासिल कर लेती है। जापान और फ्रांस जैसे देशों में हाई-स्पीड रेल के आगमन के बाद छोटी दूरी की उड़ानें रद्द की गई थीं। भारत में भी स्वदेशी हाई-स्पीड ट्रेन निर्माण को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे आयातित प्रणालियों पर निर्भरता कम होगी और लॉजिस्टिक्स लागत में कमी आएगी।
पृष्ठभूमि
भारत में हाई-स्पीड रेल और आधुनिक राजमार्गों का निर्माण स्वर्णिम चतुर्भुज योजना के बाद बुनियादी ढांचे को और मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। यह पहल मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत की नीतियों के तहत स्वदेशी तकनीक और निर्माण क्षमता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से की जा रही है।
स्रोत
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