रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह: 2029 तक रक्षा उत्पादन 3 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचेगा
दिल्ली डिफेंस डायलॉग 2026 में रक्षा मंत्री ने स्वदेशी उत्पादन और निर्यात बढ़ाने पर जोर दिया। वित्त वर्ष 2025-26 में रक्षा उत्पादन 1.78 लाख करोड़ रुपये और निर्यात 38,424 करोड़ रुपये पहुंचा।

दिल्ली में आयोजित दिल्ली डिफेंस डायलॉग 2026 के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि 21वीं सदी में सैन्य तैयारियों के लिए रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी उत्पादन और महत्वपूर्ण तकनीकों में आत्मनिर्भरता अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आत्मनिर्भरता का अर्थ अंतर्राष्ट्रीय सहयोग से अलग होना नहीं, बल्कि अपनी तकनीकी क्षमता को मजबूत करके वैश्विक सहयोग के लिए और सक्षम बनना है। मंत्री ने बताया कि रक्षा सुधार, आत्मनिर्भरता, अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और निर्यात एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं और ये सभी 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में अहम भूमिका निभाएंगे।
बदलती सैन्य चुनौतियां और निजी क्षेत्र की भूमिका
रक्षा मंत्री ने उल्लेख किया कि हाल के युद्धों ने सैन्य चुनौतियों का स्वरूप बदल दिया है, जहां लड़ाई अब जमीन, समुद्र और आसमान के साथ-साथ अंतरिक्ष, साइबर और डिजिटल क्षेत्र तक भी पहुंच गई है। सस्ते ड्रोन और ऑटोनॉमस सिस्टम अब महंगे और अत्याधुनिक सैन्य प्लेटफॉर्म के लिए चुनौती बन रहे हैं। इस संदर्भ में तेजी से नई तकनीक विकसित करना और युद्ध के दौरान हथियारों की आपूर्ति बनाए रखना जरूरी है। राजनाथ सिंह ने AMCA लड़ाकू विमान, प्रोपल्शन सिस्टम, ATAGS तोप और युद्धपोत निर्माण जैसे कार्यक्रमों में निजी कंपनियों की भागीदारी बढ़ाने पर विशेष जोर दिया।
रिकॉर्ड उत्पादन और भविष्य के लक्ष्य
रक्षा मंत्री ने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में रक्षा उत्पादन करीब 1.78 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया है, जबकि रक्षा निर्यात बढ़कर 38,424 करोड़ रुपये हो गया है। भारतीय रक्षा उत्पाद अब 80 से अधिक देशों तक पहुंच रहे हैं। सरकार का लक्ष्य है कि 2029 तक रक्षा उत्पादन को 3 लाख करोड़ रुपये और रक्षा निर्यात को 50 हजार करोड़ रुपये तक पहुंचाया जाए। उन्होंने कहा कि रक्षा औद्योगिक कॉरिडोर और ऑर्डनेंस फैक्ट्री बोर्ड को सात रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों में बदलने जैसे कदमों से उत्पादन को मजबूती मिली है, जिससे MSME और स्टार्टअप के लिए भी नए अवसर पैदा हुए हैं।
इसके अलावा, मंत्री ने विदेशी कंपनियों के साथ सह-विकास (Co-development) और सह-उत्पादन (Co-production) की दिशा में आगे बढ़ने पर जोर दिया, ताकि भारतीय कंपनियों को डिजाइन और बौद्धिक संपदा में भागीदारी मिल सके। दो दिवसीय सम्मेलन का आयोजन मनोहर पर्रिकर इंस्टीट्यूट फॉर डिफेंस स्टडीज एंड एनालिसिस (MP-IDSA) में किया जा रहा है, जहां भारत और विदेशों के रक्षा विशेषज्ञ और नीति निर्माता हिस्सा ले रहे हैं।
पृष्ठभूमि
दिल्ली डिफेंस डायलॉग 2026 का आयोजन 3 और 4 नवंबर को मनोहर पर्रिकर इंस्टीट्यूट फॉर डिफेंस स्टडीज एंड एनालिसिस (MP-IDSA), नई दिल्ली में किया जा रहा है। इस सम्मेलन का उद्देश्य भारत की रक्षा तैयारियों को मजबूत करने, स्वदेशी तकनीक को बढ़ावा देने और अंतर्राष्ट्रीय रक्षा सहयोग के लिए ठोस सुझाव तैयार करना है।
स्रोत
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- tv9hindi.com — रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भर बनेगा भारत, राजनाथ सिंह बोले- भारत की सैन्य ताकत होगी मजबूत
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