तेंदुए की खाल बेचने के 15 साल पुराने मामले में तीन दोषियों को तीन-तीन साल की सजा
नागपुर की अदालत ने वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत तीन आरोपियों को दोषी करार देते हुए कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई।

नागपुर, 5 नवंबर: केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) द्वारा जांच किए गए एक 15 वर्ष पुराने मामले में नागपुर की अदालत ने गुरुवार को तीन दोषियों को तीन-तीन साल की कैद की सजा सुनाई। इस मामले में आरोपियों पर तेंदुए की खाल की अवैध बिक्री का आरोप था। नागपुर के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने गुलाम मुस्तफा, अजय और गोपाल को दोषी करार देते हुए प्रत्येक को तीन साल के कारावास और पांच हज़ार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।
सीबीआई ने इस मामले की जांच उस आरोप पर शुरू की थी कि आरोपियों ने तेंदुए की खाल को अवैध रूप से कुछ अज्ञात व्यक्तियों को बेच दिया था। जांच पूरी होने के बाद एजेंसी ने 21 दिसंबर 2001 को आरोपपत्र दाखिल किया था। आरोपियों पर आपराधिक साजिश रचने और वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की धारा 49-बी और 51 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। इन धाराओं का उल्लंघन वन्यजीवों से जुड़े अवशेषों और पशु उत्पादों के अवैध कारोबार को प्रतिबंधित करता है।
CBI ने पटना से फरार बैंक धोखाधड़ी आरोपी को किया गिरफ्तार
सीबीआई द्वारा जांच किए जा रहे एक अन्य मामले में एजेंसी ने गुरुवार को बिहार के पुनपुन इलाके से एक घोषित फरार आरोपी को गिरफ्तार किया। यह मामला लगभग दो दशक पुराने बैंक धोखाधड़ी से जुड़ा है। एजेंसी ने राजा बिहारी समेत 21 आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत मामला दर्ज किया था।
जांच में सामने आया था कि राजा बिहारी ने बैंक अधिकारियों और बिचौलियों के साथ मिलकर इलाहाबाद बैंक की पटना स्थित पाटलिपुत्र कॉलोनी शाखा से फर्जी जमीन के कागजात, जाली संपत्ति दस्तावेज और फर्जी गारंटरों के आधार पर ऋण हासिल किया था। सीबीआई ने 30 अक्टूबर 2009 को आरोपपत्र दाखिल किया था, जिसे विशेष सीबीआई अदालत ने 12 नवंबर 2009 को स्वीकार किया था।
हालांकि, राजा बिहारी शुरू से ही जांच में शामिल नहीं हुआ और लगातार फरार रहा, जिससे अदालत में मुकदमे की कार्यवाही प्रभावित हुई। बाद में विशेष अदालत ने उसे घोषित अपराधी (प्रोक्लेम्ड ऑफेंडर) घोषित कर दिया। सीबीआई के अनुसार, खुफिया सूचनाओं और लगातार प्रयासों के बाद एजेंसी की एक विशेष टीम ने गुरुवार को उसे पुनपुन से गिरफ्तार कर लिया।
पृष्ठभूमि
वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की धारा 49-बी और 51 वन्यजीवों से जुड़े अवशेषों और पशु उत्पादों के अवैध कारोबार को प्रतिबंधित करती हैं। इसी तरह, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 बैंक धोखाधड़ी और जाली दस्तावेजों के उपयोग के मामलों में कड़ी कार्रवाई का प्रावधान करता है।
स्रोत
यह ख़बर इन 2 स्रोतों के आधार पर तैयार की गई है:
- punjabkesari.com — तेंदुए की खाल बेचने के मामले में तीन दोषियों को 3-3 साल की जेल, सीबीआई को मिली बड़ी सफलता
- bhaskarhindi.com — तेंदुए की खाल बेचने के मामले में तीन दोषियों को 3-3 साल की जेल, सीबीआई को मिली बड़ी सफलता | CBI secures 3-year jail for three leopard skin sellers (Photo: IANS)
यह लेख ऊपर दिए स्रोतों के आधार पर आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस की मदद से लिखा गया है। हम कैसे काम करते हैं।
