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1984 सिख कत्लेआम: स्वयंसेवकों की मदद की यादें और तख्त सचखंड प्रबंधन में नया मोड़

1984 के सिख कत्लेआम के दौरान स्वयंसेवकों द्वारा सिख परिवारों की रक्षा की व्यक्तिगत गवाही सामने आई है। साथ ही, तख्त सचखंड श्री हजूर साहिब नांदेड़ के प्रबंधन में नए बोर्ड की बहाली और 25 करोड़ रुपये तक के विकास कार्य की घोषणा की गई है।

तस्वीर: punjabkesari.com

भारतीय इतिहास के 1984 के सिख कत्लेआम को याद करते हुए एक व्यक्तिगत अनुभव सामने आया है, जिसमें उस दौर में स्वयंसेवकों द्वारा सिख परिवारों की रक्षा का जिक्र किया गया है। लेखक, जो उस समय 12 वर्ष के थे, बताते हैं कि 1 नवंबर 1984 को दिल्ली के गांधी नगर चांद मोहल्ले में दंगाइयों ने स्थानीय गुरुद्वारे को लूटने के बाद सिखों के घरों पर हमला किया। इस भयावह स्थिति में तेज प्रकाश छाबड़ा के नेतृत्व में आरएसएस के स्वयंसेवक दंगाइयों के सामने खड़े हो गए और उनका प्रतिरोध किया।

उस दिन के बाद अगले चार दिनों तक इन स्वयंसेवकों ने सिख परिवारों को अपने घरों में आश्रय दिया और उनकी सुरक्षा का ध्यान रखा। लेखक का दावा है कि यदि उस समय इन लोगों का साथ न होता, तो उनके परिवार का अस्तित्व संकट में पड़ सकता था। यह अनुभव राजनीतिक बयान नहीं, बल्कि बचपन की आंखों से देखा गया सच बताया गया है। हालांकि, लेख में यह भी उल्लेख किया गया है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को आज भी सिख समुदाय के कई लोग दुश्मन मानते हैं, लेकिन इतिहास का मूल्यांकन तथ्यों से होना चाहिए, न कि राजनीतिक सुविधा के आधार पर।

राजनीतिक सवाल और श्रद्धांजलि

1984 के पीड़ित परिवारों के घाव आज भी भरने नहीं पाए हैं, ऐसे में कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में रैली आयोजित करने का निर्णय सवालिया नजर से देखा गया है। आलोचना का मुख्य बिंदू यह है कि जिस दिन हजारों सिख परिवार अपने प्रियजनों की मृत्यु का दुख याद करते हैं, उसी दिन राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन की क्या आवश्यकता थी। वहीं, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और भाजपा के अन्य कार्यकर्ताओं ने पश्चिमी दिल्ली में सिख समाज के साथ मिलकर शहीदों को श्रद्धांजलि दी।

तख्त साहिब प्रबंधन में नई व्यवस्था

तख्त सचखंड श्री हजूर साहिब, नांदेड़ के प्रबंधन को सिख संगतों द्वारा चयनित बोर्ड के हवाले करने का फैसला लिया गया है। इस नए बोर्ड में सरदार गुरविन्दर सिंह बावा उपाध्यक्ष के रूप में जिम्मेदारी संभाल रहे हैं, जिन्होंने पूर्व अध्यक्ष सरदार भूपिन्दर सिंह मिन्हास के निधन के बाद प्रबंधन का भार संभाला था। महासचिव सरदार रविन्दर सिंह बुंगई सहित अनुभवी सदस्यों की टीम ने लगभग 20 से 25 करोड़ रुपये तक की विभिन्न सेवाओं और विकास कार्यों की घोषणा की है।

इन घोषणाओं में सबसे महत्वपूर्ण पहल स्वास्थ्य सेवाओं की है, जिसके तहत 15 करोड़ रुपये की लागत से आधुनिक चिकित्सा जांच सुविधाएं, जैसे एमआरआई, सीटी स्कैन और एक्स-रे, स्थापित की जाएंगी। इसके अलावा, कर्मचारियों को 50 प्रतिशत त्योहार बोनस और दिवाली पर आर्थिक सहायता देने की भी घोषणा की गई है। धर्म में भाई हैदराबाद निवासी सुरिन्दर सिंह सलूजा द्वारा 5 करोड़ रुपये की लागत से सोलर प्लांट लगाने की योजना भी बनाई गई है, जिससे बिजली की बचत होगी।

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पृष्ठभूमि

1984 का सिख कत्लेआम भारतीय इतिहास का एक विवादित और दर्दनाक अध्याय है, जिसमें राजनीतिक दलों की भूमिका को लेकर आज भी सवाल उठते रहते हैं। इस घटना के 42 वर्ष बाद भी पीड़ित परिवार न्याय की मांग करते हुए आगे बढ़ रहे हैं।

स्रोत

यह ख़बर इस स्रोत के आधार पर तैयार की गई है:

  • punjabkesari.com — संघ स्वयंसेवक बने थे सिखों के मददगार

यह लेख ऊपर दिए स्रोतों के आधार पर आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस की मदद से लिखा गया है। हम कैसे काम करते हैं।

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