लालकृष्ण आडवाणी ने पूरे किए 100 वर्ष; दीपावली पर शताब्दी पूर्ण करने का ऐतिहासिक पल
8 नवंबर को लालकृष्ण आडवाणी ने अपने जीवन के सौवें वर्ष में प्रवेश किया। इस दिन ही दीपावली पर्व भी मनाया जा रहा है, जिससे यह अवसर और भी विशेष बन गया है।

8 नवंबर, 2026 को भारतीय राजनीति के दिग्गज नेता लालकृष्ण आडवाणी ने अपने जीवन के सौवें वर्ष में प्रवेश किया। यह दिन उनके लिए दोगुने अर्थों में विशेष है क्योंकि इसी दिन दीपावली का पावन पर्व भी मनाया जा रहा है। आडवाणी जी का जन्म 8 नवंबर 1927 को देव दीपावली के दिन हुआ था। इस वर्ष के अन्य महत्वपूर्ण पर्वों में जनसंघ की स्थापना के 75 वर्ष, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के 100 वर्ष और डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती भी शामिल हैं।
आडवाणी जी का जीवन आधुनिक भारत के इतिहास के कई महत्वपूर्ण अध्यायों से जुड़ा हुआ है। 1947 में विभाजन के दौरान उन्होंने सिंध में अपना घर और परिवेश छोड़कर भारत में नई शुरुआत की थी। इस कठिन अनुभव ने उनके व्यक्तित्व में नई ऊर्जा और संकल्प को मजबूत किया। उन्होंने इस पीड़ा को कड़वाहट में नहीं बदला, बल्कि नए सिरे से कुछ खड़ा करने के संकल्प के साथ आगे बढ़ा।
राजनीतिक यात्रा और संस्थागत विकास
आडवाणी जी ने अपने करियर की शुरुआत राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक के रूप में की। उन्होंने सबसे पहले राजस्थान के विभिन्न क्षेत्रों में काम किया और बाद में दिल्ली में अटल बिहारी वाजपेयी के साथ मिलकर काम करने का अवसर पाया। इन दोनों नेताओं के बीच दशकों तक चलने वाले सहयोग और विश्वास का रिश्ता भारतीय राजनीति में एक अप्रतिम मिसाल माना जाता है। 1967 में वे दिल्ली महानगर परिषद के अध्यक्ष बने और 1970 के दशक से संसद में सक्रिय रूप से शामिल होने लगे।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में उनके कार्यकाल ने देश की राजनीतिक परिदृश्य में बड़े बदलाव लाए। 1989 के चुनावों में कांग्रेस की सीटों में कमी आई और 1996 में भाजपा पहली बार देश की सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। आडवाणी जी ने 'राष्ट्र प्रथम' के सिद्धांत पर पार्टी की मजबूत नींव रखी और कार्यकर्ताओं की अनेक पीढ़ियों को तैयार किया।
आपातकाल, रथयात्रा और प्रशासनिक योगदान
आपातकाल आडवाणी जी के जीवन का एक महत्वपूर्ण मोड़ था, जिस दौरान उन्होंने लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए संघर्ष किया। इस अनुभव का वर्णन उनकी पुस्तक 'A Prisoner's Scrap-Book' में मिलता है, जिसमें उन्होंने 1975 के आपातकाल और 1933 में हिटलर के शासन के बीच समानताओं पर प्रकाश डाला है। 1977 में जनता पार्टी की सरकार बनने के बाद उन्हें सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की जिम्मेदारी मिली, जिसके दौरान उनका कार्यकाल प्रभावशाली माना जाता है।
उन्होंने उपप्रधानमंत्री और गृह मंत्री के रूप में भी देश की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आतंकवाद के खिलाफ उनके दृढ़ रुख के कारण देश को एक सख्त कानून मिला। सोमनाथ से अयोध्या तक की ऐतिहासिक रथयात्रा उनके जीवन का एक प्रमुख अध्याय है, जिसने भारतीय समाज को एक नई दिशा दी। इस यात्रा के दौरान बिहार में उनकी गिरफ्तारी ने भी राजनीतिक संदेश स्पष्ट किया था कि राम मंदिर निर्माण के संकल्प पर कोई समझौता नहीं होगा।
आडवाणी जी का व्यक्तित्व सादगी, वैचारिक स्पष्टता और सिद्धांतों के प्रति अटूट निष्ठा से परिभाषित होता है। उनकी साहित्यिक रुचि और इतिहास के प्रति गहरी समझ उनकी पुस्तक 'My Country My Life' में झलकती है। आज 100 वर्ष की आयु में भी वे राजनीतिक और सामाजिक विमर्शों में सक्रिय रहते हैं और युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत बने हुए हैं।
पृष्ठभूमि
लालकृष्ण आडवाणी भारतीय राजनीति के वरिष्ठ नेता हैं जिन्होंने 1947 के विभाजन के बाद भारत में नई शुरुआत की। उन्होंने जनसंघ और भाजपा के विकास में केंद्रीय भूमिका निभाई और 1998-2004 के बीच उपप्रधानमंत्री और गृह मंत्री के रूप में सेवा दी।
स्रोत
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- punjabkesari.com — आडवाणी जी : एक शताब्दी की ओर बढ़ती प्रेरणादायी यात्रा
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