दिल्ली विश्वविद्यालय ने विभाजन के 100 साक्षात्कारों का डिजिटल संग्रह तैयार किया
दिल्ली विश्वविद्यालय के स्वतंत्रता एवं विभाजन अध्ययन केंद्र (सीआईपीएस) ने विभाजन के पीड़ितों के 100 साक्षात्कार पूरे करके एक डिजिटल संग्रह तैयार किया है। इसका उद्देश्य 1947 के मानवीय प्रभाव को दस्तावेजित करना और आने वाली पीढ़ियों के लिए इन स्मृतियों को सुरक्षित रखना है।

दिल्ली विश्वविद्यालय ने भारत के विभाजन से जुड़े ऐतिहासिक दस्तावेजों और व्यक्तिगत अनुभवों के संरक्षण के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। विश्वविद्यालय के स्वतंत्रता एवं विभाजन अध्ययन केंद्र (सीआईपीएस) ने हाल ही में विभाजन के पीड़ितों के 100 साक्षात्कार पूरे किए हैं। इन साक्षात्कारों को वीडियो और दस्तावेजों के रूप में डिजिटल रूप से संग्रहित किया गया है ताकि 1947 के घटनाक्रम के मानवीय प्रभाव का एक प्रामाणिक रिकॉर्ड बनाया जा सके।
शोध और दस्तावेजीकरण की प्रक्रिया
सीआईपीएस की स्थापना वर्ष 2023 में एक अध्यादेश के अंतर्गत की गई थी, जिसका मुख्य उद्देश्य विभाजन से प्रभावित समुदायों के दस्तावेजों, तस्वीरों और मौखिक इतिहास का एक भंडार बनाना था। केंद्र की टीमें दिल्ली-एनसीआर में रहने वाले उन लोगों के साक्षात्कार ले रही हैं जो विभाजन के प्रत्यक्षदर्शियों के रूप में अभी भी जीवित हैं। इन साक्षात्कारों में विभाजन के दौरान हुए विस्थापन, खोए हुए लोगों और बाद में जीवन के पुनर्निर्माण की कहानियां शामिल हैं। केंद्र के निदेशक डा. रविंद्र कुमार के अनुसार, ये कहानियां भावनाओं का एक पूरा दायरा प्रस्तुत करती हैं और ऐतिहासिक वृत्तांतों में मौजूद कमियों को दूर करने में मदद करती हैं।
केंद्र ने केवल साक्षात्कारों तक सीमित नहीं रहते हुए विभाजन पर लिखे गए साहित्य का भी एक व्यापक संग्रह तैयार किया है। इस सूची में विभिन्न भाषाओं की पुस्तकें शामिल हैं, जिनमें 245 अंग्रेजी, 31 हिंदी, 87 पंजाबी, 4 उर्दू और 7 बंगाली पुस्तकों के साथ-साथ कई शोध-पत्र भी संकलित किए गए हैं। इसके अलावा, विश्वविद्यालय समय-समय पर भारतीय ऐतिहासिक अनुसंधान परिषद (आईएचआर) और अन्य संस्थाओं के सहयोग से राष्ट्रीय संगोष्ठियां और सेमिनार आयोजित करता है। इन कार्यक्रमों में विभाजन के सामाजिक और आर्थिक प्रभावों पर गहन चर्चा की जाती है।
भविष्य की योजनाएं और चुनौतियां
हालांकि अब तक का कार्य मुख्य रूप से दिल्ली-एनसीआर तक सीमित रहा है, लेकिन केंद्र का लक्ष्य इस पहल को राष्ट्रव्यापी स्तर पर विस्तारित करना है। डा. रविंद्र कुमार ने बताया कि अब ध्यान अन्य राज्यों तक विस्तार करने और विभाजन पीड़ितों की कहानियों को समय से पहले संकलित करने पर केंद्रित है, क्योंकि प्रत्यक्षदर्शियों की संख्या लगातार कम हो रही है। केंद्र की वेबसाइट और यूट्यूब चैनल पर इन साक्षात्कारों को अपलोड किया गया है, जिससे वे आम जनता के लिए सुलभ हो रहे हैं। इस प्रयास के पीछे यह मान्यता है कि आने वाली पीढ़ियों को अपने पूर्वजों के इतिहास और बलिदानों के बारे में जानना आवश्यक है, क्योंकि यह किसी विशेष समुदाय की नहीं, बल्कि पूरे देश की विरासत का हिस्सा है।
पृष्ठभूमि
भारत के 1947 के विभाजन से जुड़ी स्मृतियों का दस्तावेजीकरण एक लंबे समय से चल रहा प्रयास है। अमृतसर, दिल्ली और लाहौर में विभाजन से जुड़े संग्रहालय पहले से मौजूद हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय का यह केंद्र विशेष रूप से मौखिक इतिहास और डिजिटल अभिलेखों पर केंद्रित है, जो कि विभाजन के पीड़ितों के व्यक्तिगत अनुभवों को वैज्ञानिक और ऐतिहासिक दृष्टि से समझने का एक नया माध्यम प्रदान करता है।
स्रोत
यह ख़बर इस स्रोत के आधार पर तैयार की गई है:
- punjabkesari.com — विभाजन की दास्तानों का डिजिटल व दस्तावेजीकरण
यह लेख ऊपर दिए स्रोतों के आधार पर आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस की मदद से लिखा गया है। हम कैसे काम करते हैं।


