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राजनीति · बिहार

अमित शाह ने राहुल को संसद में बहस की चुनौती दी, जेडीयू ने कहा- स्वीकार करें

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को संसद के विशेष सत्र में बहस करने की चुनौती दी है। जेडीयू के प्रवक्ता राजीव रंजन ने राहुल गांधी से इस चुनौती को स्वीकार करने की अपील की है।

तस्वीर: bhaskarhindi.com

नई दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के बीच राजनीतिक तनातनी एक नए मोड़ पर पहुंची है। अमित शाह ने हाल ही में राहुल गांधी को एक सीधी चुनौती दी है कि वे संसद के विशेष सत्र बुलाकर वहां बैठकर बहस करें। शाह का कहना है कि नरेंद्र मोदी सरकार हर मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है और जरूरत पड़ने पर इस विषय पर संसद का विशेष सत्र भी बुलाया जा सकता है। इस बयान पर राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई है और विपक्षी दलों ने भी अपनी प्रतिक्रियाएं देना शुरू कर दिया है।

अमित शाह ने विपक्ष के हालिया आयोजनों को 'नकली संसद' के रूप में बखूबी आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष संसद की कार्यवाही नहीं चलने देता और सदन को ठप कर देता है, जबकि असली संसदीय परंपराओं का मजाक उड़ाता है। शाह के अनुसार, ऐसे बाहरी आयोजनों से संसद की गरिमा प्रभावित होती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अगर विपक्षी दल वास्तव में बहस करना चाहते हैं, तो वे संसद के भीतर ही आएं।

जेडीयू ने राहुल गांधी से चुनौती स्वीकार करने की अपील

इस सियासी घटनाक्रम पर जनता दल यूनाइटेड (JDU) के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन ने प्रतिक्रिया दी है। राजीव रंजन ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री द्वारा दी गई इस चुनौती को राहुल गांधी को स्वीकार करनी चाहिए। उन्होंने अपने बयान में कहा कि बहस राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के किसी भी नेता से की जा सकती है, ताकि एक गठबंधन और राष्ट्र के दृष्टिकोण से परिचित हो सकें।

राजीव रंजन ने आगे कहा कि जिस तरह दुनिया के अनेक देशों में हिंसात्मक आंदोलन हो रहे हैं, उससे प्रेरित होकर जो रुख राहुल गांधी दिखा रहे हैं, वह भारत की लोकतांत्रिक परंपरा के अनुकूल नहीं है। उन्होंने तर्क दिया कि अराजकता को भारतीय जनता ने कभी स्वीकारा नहीं है। संसदीय लोकतंत्र में आस्था और विश्वास का एक निश्चित दायरा होता है, जिसका सम्मान सभी को करना पड़ता है।

असर और पृष्ठभूमि

यह तनातनी मुख्य रूप से विशेष तीव्र समीक्षा (SIR) और अन्य मुद्दों पर विपक्ष के विरोध के बीच उभरी है। अमित शाह ने पिछले कुछ दिनों से बार-बार यह बात दोहराई है कि तीन करोड़ फर्जी, मृत और अवैध घुसपैठियों के नामों को वोटर सूची से हटाया गया है। बिहार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने इस बयान का समर्थन करते हुए कांग्रेस पर सवाल उठाया है कि क्या उसका अस्तित्व केवल अवैध घुसपैठियों के वोटों पर टिका है।

वहीं, जेडीयू के राष्ट्रीय महासचिव श्याम रजक ने इस मुद्दे को व्यक्तिगत स्तर पर नहीं, बल्कि प्रशासनिक गलती के रूप में देखा। उन्होंने कहा कि अगर कोई अवैध नाम जुड़ गया है, तो यह अधिकारियों की गलती है और उसे सुधारना चाहिए, न कि इसे राजनीतिक बहस का विषय बनाकर जनता को गुमराह करना चाहिए। इस पूरे घमासान के बीच अब सभी नजरें राहुल गांधी की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं कि क्या वे अमित शाह की दी गई इस संसदीय बहस की चुनौती स्वीकार करते हैं या नहीं।

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पृष्ठभूमि

यह बहस विशेष तीव्र समीक्षा (SIR) के दौरान वोटर सूची से नामों के हटाने और विपक्ष के विरोध प्रदर्शनों के बीच उभरी है। अमित शाह ने इस दौरान कांग्रेस पर नक्सलवाद का समर्थन करने का भी आरोप लगाया है, जबकि विपक्ष सरकार की प्रक्रियाओं की आलोचना कर रहा है।

स्रोत

यह ख़बर इन 4 स्रोतों के आधार पर तैयार की गई है:

  • bhaskarhindi.com — Bihar News: संसद में बहस करने को लेकर मचा सियासी घमासान, जेडीयू नेता बोले- शाह के चैलेंज को राहुल करें स्वीकार? | Political turmoil erupts over debate in Parliament, JDU leader's statement
  • hindi.newsbytesapp.com — राहुल गांधी का भगवंत मान पर निशाना, बोले- उनके मुंह से शराब की बदबू आती थी
  • punjabkesari.com — क्या कांग्रेस का पूरा अस्तित्व केवल रोहिंग्या और अवैध घुसपैठियों के फर्जी वोटों पर टिका : भाजपा
  • hindi.asianetnews.com — 'राहुल गांधी, तैयार हैं तो बुला लें स्पेशल सेशन...', अमित शाह ने SIR पर दी खुली चुनौती

यह लेख ऊपर दिए स्रोतों के आधार पर आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस की मदद से लिखा गया है। हम कैसे काम करते हैं।

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