सेंसेक्स 905 अंक चढ़ा, आईटी और बैंकिंग शेयरों में खरीदारी से बाजार में तेजी
अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दरों को स्थिर रखने और विदेशी निवेशकों की खरीदारी से भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को जोरदार तेजी आई।

भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को पिछले दो कारोबारी सत्रों की गिरावट के बाद जोरदार तेजी दर्ज की गई। सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी), बैंकिंग और अन्य प्रमुख कंपनियों के शेयरों में बढ़ती खरीदारी ने निवेशकों का भरोसा पुनर्स्थापित किया। इस तेजी का प्रमुख कारण अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों को अपरिवर्तित रखने का फैसला और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) द्वारा की गई खरीदारी रहा।
बीएसई का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 905.01 अंक, यानी 1.24 प्रतिशत की बढ़त के साथ 74,151.04 पर बंद हुआ। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी 50 भी 237.90 अंक, यानी 1.05 प्रतिशत चढ़कर 22,936.75 के स्तर पर पहुंच गया। इससे निफ्टी दोबारा 22,900 के स्तर के ऊपर बंद हुआ। इससे पहले लगातार दो सत्रों में सेंसेक्स में 0.49 प्रतिशत और निफ्टी में 0.24 प्रतिशत की गिरावट आई थी।
वैश्विक कारकों का असर और बाजार की दिशा
अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने 10-2 के मत से अपनी प्रमुख ब्याज दर की लक्ष्य सीमा 3.75 से 4 प्रतिशत पर बरकरार रखी। हालांकि, दो अधिकारियों ने इस फैसले से असहमति जताई और ब्याज दर में 0.25 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी का समर्थन किया, जिससे स्पष्ट हुआ कि महंगाई पर काबू पाने के लिए मौद्रिक नीति की दिशा को लेकर फेड के भीतर मतभेद बने हुए हैं। इस फैसले के बाद दिसंबर में ब्याज दर बढ़ने की बाजार की अनुमानित संभावना 85 प्रतिशत हो गई, जो एक दिन पहले 78.3 प्रतिशत थी।
वैश्विक बाजारों में भी उतार-चढ़ाव रहा। अमेरिका के प्रमुख शेयर बाजार बुधवार को बढ़त के साथ बंद हुए, जहां डाउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 0.19 प्रतिशत और एसएंडपी 500 सूचकांक 0.28 प्रतिशत चढ़ा। प्रौद्योगिकी कंपनियों के तिमाही नतीजों ने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया। माइक्रोसॉफ्ट के शेयर कारोबार के बाद के सत्र में 4 प्रतिशत से अधिक चढ़ गए, जबकि अल्फाबेट के शेयर 7 प्रतिशत से अधिक गिर गए।
घरेलू बाजार में तेजी का दायरा मजबूत रहा। बीएसई पर कुल 2,654 शेयर बढ़त के साथ बंद हुए, जबकि 1,716 शेयरों में गिरावट आई। 225 शेयरों के भाव में कोई बदलाव नहीं हुआ। एनएसई का इंडिया वीआईएक्स सूचकांक 6.43 प्रतिशत गिरकर 15.20 पर आ गया, जो बाजार में तत्काल चिंता कम होने का संकेत माना जाता है।
कच्चे तेल की कीमतों में कुछ नरमी आई, लेकिन स्तर ऊंचा बना रहा। दिसंबर 2026 डिलीवरी वाला ब्रेंट क्रूड वायदा 1.38 डॉलर यानी 1.24 प्रतिशत गिरकर 110.26 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। भारत के 10 वर्षीय बेंचमार्क सरकारी बॉन्ड की यील्ड 7.440 प्रतिशत से घटकर 7.399 प्रतिशत रह गई। विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया मामूली मजबूत हुआ और डॉलर के मुकाबले 95.2700 पर कारोबार कर रहा था।
कंपनियों के तिमाही नतीजों के आधार पर कई शेयरों में उल्लेखनीय उतार-चढ़ाव देखने को मिला। हीरो मोटोकॉर्प का शेयर 4.09 प्रतिशत गिर गया, जबकि कंपनी ने लाभ और बिक्री में अच्छी सालाना वृद्धि दर्ज की। एशियन पेंट्स का शेयर 0.76 प्रतिशत बढ़ा, जबकि यूनाइटेड स्पिरिट्स में 5.06 प्रतिशत की तेजी आई। जुपिटर वैगन्स का शेयर 6.66 प्रतिशत चढ़ा, जिसके पीछे रेल मंत्रालय से 1,140 करोड़ रुपये का ऑर्डर मिलना मुख्य कारण था। बिरलासॉफ्ट का शेयर 11.89 प्रतिशत उछला और वी-गार्ड इंडस्ट्रीज का शेयर 7.90 प्रतिशत चढ़ा।
पृष्ठभूमि
भारतीय शेयर बाजार पिछले कुछ सत्रों में वैश्विक अनिश्चितता और अमेरिकी ब्याज दरों के रुझान के कारण उतार-चढ़ाव का सामना कर रहा था। अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति का फैसला उभरते बाजारों, विशेष रूप से भारत जैसे देशों में विदेशी पूंजी के प्रवाह और शेयरों के मूल्यांकन पर प्रत्यक्ष असर डालता है।
स्रोत
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