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मध्यप्रदेश की रुपाली सिंघई ने 10 वर्षों में 5200 यूनिट रक्त जुटाए, बच्चों ने दिया 'मदर ऑफ थैलेसीमिया' नाम

शहडोल की रुपाली सिंघई पिछले दशक से सिकल सेल और थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों के लिए रक्त उपलब्ध कराने और सरकारी योजनाओं से जोड़ने में लगी हैं।

तस्वीर: hindi.news18.com

मध्यप्रदेश के शहडोल जिले में रुपाली सिंघई पिछले करीब दशक से सिकल सेल और थैलेसीमिया से पीड़ित बच्चों और उनके परिवारों की सेवा में लगी हुई हैं। इन बीमारियों से जूझ रहे बच्चों को नियमित रूप से रक्त की आवश्यकता होती है, जिसमें कई को हर 15 से 20 दिन में रक्त चढ़ाना पड़ता है। इस संदर्भ में समय पर रक्त उपलब्ध कराना और परिवारों को उपचार की जानकारी दिलाना एक बड़ी चुनौती है, जिसे रुपाली ने अपने जीवन का मुख्य उद्देश्य बना लिया है।

बच्चों ने दी 'मदर ऑफ थैलेसीमिया' की पहचान

रुपाली सिंघई को 'मदर ऑफ थैलेसीमिया' की पहचान 18 दिसंबर 2022 को आयोजित एक विशेष वर्कशॉप के दौरान मिली थी। इस कार्यक्रम में जबलपुर के डॉ. शरद जैन और इंदौर के डॉ. सुनीत लोकवानी ने बच्चों की ओपीडी की और माता-पिता को बीमारी व देखभाल से जुड़ी जानकारी दी। इस अवसर पर बच्चों ने उन्हें यह उपाधि दी, क्योंकि वे मानते हैं कि रुपाली उनकी रक्षा करती हैं। इस पल को याद करते हुए रुपाली ने बताया कि उन्हें बच्चों का यह प्यार और भरोसा बहुत भावुक कर गया था।

रक्तदान और सरकारी सुविधाओं में सहयोग

अब तक रुपाली सिंघई ने 300 से अधिक रक्तदान शिविरों के आयोजन में सहयोग किया है, जिनके माध्यम से करीब 5200 यूनिट रक्त जुटाने में मदद मिली है। वे खुद 38 बार रक्तदान कर चुकी हैं, जिनमें 34 बार सामान्य रक्तदान और 4 बार सिंगल डोनर प्लेटलेट्स शामिल हैं। उनके पति डॉ. नितिन सिंघई और बेटे मौलिक सिंघई भी इस अभियान में शामिल हैं। इसके अलावा, उन्होंने 339 बच्चों के UDID कार्ड बनवाने में और 123 बच्चों को बस किराये में रियायत दिलाने में मदद की है।

रुपाली का प्रयास बच्चों को HLA जांच, बोन मैरो ट्रांसप्लांट और अन्य चिकित्सा प्रक्रियाओं की जानकारी दिलाने तक सीमित नहीं है। 30 मार्च 2025 को आयोजित एक निःशुल्क HLA जांच शिविर में चार बच्चों की रिपोर्ट उनकी बहनों से मैच हुई, जिससे बोन मैरो ट्रांसप्लांट की संभावनाएं बढ़ी हैं। जागरूकता के लिए उन्होंने अब तक 116 सत्र आयोजित किए हैं और 45 से अधिक स्त्री रोग विशेषज्ञों के साथ मिलकर HPLC जांच की उपलब्धता बढ़ाने का प्रयास कर रही हैं। मध्यप्रदेश शासन ने उन्हें मोटिवेटर के रूप में प्रस्तुत किया है और विभिन्न जिलों के ब्लड बैंकों में उनकी तस्वीर वाले पोस्टर लगाए गए हैं ताकि लोगों को स्वैच्छिक रक्तदान के लिए प्रेरित किया जा सके।

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पृष्ठभूमि

सिकल सेल और थैलेसीमिया जैसी आनुवंशिक बीमारियों के रोगियों को जीवनभर नियमित रक्त पारगमन की आवश्यकता होती है। शहडोल जैसे क्षेत्रों में समय पर रक्त उपलब्ध कराना कठिन होता है, जिसके लिए स्वैच्छिक अभियानों की आवश्यकता होती है।

स्रोत

यह ख़बर इस स्रोत के आधार पर तैयार की गई है:

  • hindi.news18.com — 10 साल से थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों की मदद कर रहीं रुपाली सिंघई

यह लेख ऊपर दिए स्रोतों के आधार पर आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस की मदद से लिखा गया है। हम कैसे काम करते हैं।

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