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सड़क सुरक्षा में एआई और भू-स्थानिक डेटा के उपयोग पर आईआईटी मद्रास में विशेष चर्चा

पूर्व सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश न्यायमूर्ति अभय मनोहर सप्रे ने आईआईटी मद्रास में सड़क दुर्घटनाओं के कारणों और तकनीकी समाधानों पर प्रकाश डाला।

तस्वीर: punjabkesari.com

नई दिल्ली। सड़क दुर्घटनाओं को नियंत्रित करने और सड़क सुरक्षा को बेहतर बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) तथा भू-स्थानिक डेटा के उपयोग पर बुधवार को आईआईटी मद्रास में एक विशेष चर्चा का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में भारत के पूर्व सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश और सुप्रीम कोर्ट की सड़क सुरक्षा समिति के अध्यक्ष न्यायमूर्ति अभय मनोहर सप्रे ने मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया। समिति के सदस्य संजय बंदोपाध्याय भी मौजूद थे। इस बैठक में देशभर से छात्र, विशेषज्ञ और नवाचार से जुड़े पेशेवरों ने भी हिस्सा लिया।

हादसों के मुख्य कारण और तकनीकी समाधान

चर्चा के दौरान न्यायमूर्ति अभय मनोहर ने बताया कि तेज रफ्तार, शराब पीकर वाहन चलाना, गलत दिशा में ड्राइविंग, रेड लाइट जंप करना, ड्राइविंग के दौरान मोबाइल फोन का इस्तेमाल, असुरक्षित ओवरटेकिंग और चालक की थकान सड़क हादसों की प्रमुख वजहें हैं। उन्होंने प्रभावी समाधानों के लिए 'फर्स्ट प्रिंसिपल्स थिंकिंग' यानी मूलभूत सिद्धांतों पर आधारित सोच की आवश्यकता पर जोर दिया। कार्यक्रम में तमिलनाडु सरकार और आरबीजी लैब्स द्वारा विकसित 'रोड सेफ्टी इनोवेशन हब' का परिचय भी दिया गया। यह मंच छात्रों और उद्यमियों को नए विचारों को परखने का अवसर प्रदान करता है। यह हब आईआईटी मद्रास के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर रोड सेफ्टी के साथ मिलकर डेटा आधारित सुरक्षा उपायों और स्मार्ट मोबिलिटी टूल्स के विकास पर काम कर रहा है। इसका लक्ष्य कम लागत वाले इंजीनियरिंग समाधानों के जरिए मौतों की संख्या घटाना है।

चिंताजनक आंकड़ों पर प्रकाश

कार्यक्रम में सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के संसद में साझा किए गए आंकड़ों का हवाला दिया गया। इसमें बताया गया कि वर्ष 2024 में भारत में सड़क दुर्घटनाओं में 1,77,177 लोगों की मौत हुई, जो पिछले वर्ष की तुलना में 2.3 प्रतिशत अधिक है। मंत्रालय के अनुसार, देश में प्रतिदिन औसतन 485 और हर घंटे करीब 20 लोगों की जान जाती है। आंकड़ों के मुताबिक, मृतकों में 46.2 प्रतिशत दोपहिया वाहन चालक और 20.6 प्रतिशत पैदल यात्री शामिल हैं। उम्र के हिसाब से, 66.1 प्रतिशत मृतक 18 से 45 वर्ष के आयु वर्ग के हैं, जबकि 18 से 60 वर्ष के लोगों की हिस्सेदारी 83.3 प्रतिशत है। यह पहल ओडिशा और आईआईटी दिल्ली की तकनीक-आधारित सड़क सुरक्षा योजनाओं के अनुरूप भी है।

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पृष्ठभूमि

भारत में सड़क सुरक्षा एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 2022 से 2024 के बीच सड़क दुर्घटनाओं में जान गंवाने वालों की संख्या लगातर बढ़ रही है। 2022 में यह संख्या 1,68,491 थी, जो 2023 में 1,72,890 और 2024 में 1,77,177 हो गई। इस पृष्ठभूमि में तकनीक और डेटा का उपयोग करके सुरक्षा उपायों को मजबूत करने की दिशा में यह चर्चा महत्वपूर्ण है।

स्रोत

यह ख़बर इन 2 स्रोतों के आधार पर तैयार की गई है:

  • punjabkesari.com — सड़क हादसे रोकने में एआई की भूमिका पर आईआईटी मद्रास में मंथन
  • bhaskarhindi.com — सड़क हादसे रोकने में एआई की भूमिका पर आईआईटी मद्रास में मंथन | Use of technology for greater road safety discussed at IIT Madras (Photo: IANS)

यह लेख ऊपर दिए स्रोतों के आधार पर आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस की मदद से लिखा गया है। हम कैसे काम करते हैं।

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