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दिल्ली कोर्ट ने चाकूबाजी केस में आरोपी को दोषी ठहराया, पीड़ित के मुकरने पर नहीं दिया फायदा

दिल्ली की अदालत ने 23 वर्षीय युवक पर चाकू से हमले के मामले में मोहम्मद अरमान को दोषी ठहराया है। अदालत ने माना कि पीड़ित के बाद में बयान बदलने से पहले की गवाही और मेडिकल रिपोर्ट की वैधता प्रभावित नहीं होती।

तस्वीर: hindi.news18.com

दिल्ली की अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सुमेध कुमार सेठी की अदालत ने चाकू से जानलेवा हमले के गंभीर मामले में अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने आरोपी मोहम्मद अरमान उर्फ मन्नू को दोषी करार दिया है। इस फैसले में न्यायालय ने यह स्पष्ट किया है कि यदि पीड़ित या अन्य गवाह मुकदमे की सुनवाई के दौरान अपने पुराने बयानों से पलट जाते हैं, तो इससे उनके शुरुआती दिए गए बयानों की कानूनी वैधता समाप्त नहीं होती।

मेडिकल रिपोर्ट को ठोस सबूत माना

मामले की तफ़सील के मुताबिक, 12 अक्टूबर 2024 की रात उत्तर-पूर्वी दिल्ली के सुंदर नगरी इलाके में 23 वर्षीय सागर पर उसके घर के पास चाकू से हमला किया गया था। इस घटना में पीड़ित के पेट और हाथ पर गहरे जख्म आए थे, जिसके बाद उसे गंभीर हालत में नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। पुलिस को दिए गए अपने प्रारंभिक बयान में सागर ने आरोप लगाया था कि अरमान के साथ उसके मामा सुरेश के बीच पुराना विवाद चल रहा था। इसी रंजिश के चलते अरमान ने पहले उसे जान से मारने की धमकी दी और बाद में धारदार हथियार से ताबड़तोड़ वार किए।

सुनवाई के दौरान अदालत में स्थिति बदल गई जब पीड़ित सागर ने शुरू में अरमान की पहचान करने के कुछ ही देर बाद अपनी बात से पलट लिया। उसने दावा किया कि उसे हमलावर का चेहरा याद नहीं है और अरमान ने उस पर चाकू नहीं चलाया था। वारदात के समय मौजूद अन्य प्रत्यक्षदर्शी गवाहों ने भी पुलिस को दिए गए अपने पुराने बयानों को नकार दिया।

हालांकि, अदालत ने बचाव पक्ष के तर्कों को खारिज कर दिया। जज ने मेडिको-लीगल रिपोर्ट (MLR) को सबसे बड़ा सबूत माना, जिसमें दर्ज था कि पीड़ित को किसी परिचित व्यक्ति द्वारा गंभीर चोटें पहुंचाई गई थीं। अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि शिकायतकर्ता ने अपने शरीर पर ये चोटें खुद नहीं बनाई हैं। न्यायालय ने साक्ष्यों की कड़ियों को जोड़ते हुए निष्कर्ष निकाला कि अभियोजन पक्ष ने यह साबित कर दिया है कि अरमान ने ही सागर पर हमला किया था।

अंत में, कोर्ट ने अरमान को हत्या की कोशिश की धारा और प्रतिबंधित चाकू के इस्तेमाल के दोषी ठहराया है। यह फैसला उन मामलों के लिए महत्वपूर्ण है जहां पीड़ित या गवाह बाद में अपने बयान बदल लेते हैं, जिसमें अदालत मेडिकल प्रमाणों और प्रारंभिक गवाही पर अधिक भरोसा करती है।

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पृष्ठभूमि

यह मामला 12 अक्टूबर 2024 को सुंदर नगरी में हुआ था, जहां 23 वर्षीय सागर पर पुराने विवाद के चलते चाकू से हमला किया गया था।

स्रोत

यह ख़बर इस स्रोत के आधार पर तैयार की गई है:

  • hindi.news18.com — पीड़ित मुकरा फिर भी आरोपी दोषी, दिल्ली कोर्ट ने चाकूबाजी केस में सुनाया फैसला

यह लेख ऊपर दिए स्रोतों के आधार पर आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस की मदद से लिखा गया है। हम कैसे काम करते हैं।

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