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कैबिनेट ने 2031 तक बढ़ाई फास्ट ट्रैक कोर्ट योजना, 850 न्यायालयों का लक्ष्य

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने दुष्कर्म और पॉक्सो मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए विशेष न्यायालयों की योजना को पांच वर्षों के लिए जारी रखने और इनकी संख्या 850 तक बढ़ाने के फैसले को मंजूरी दी है।

तस्वीर: punjabkesari.com

नई दिल्ली, 4 नवंबर: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल बैठक में एक महत्वपूर्ण फैसला लिया गया। कैबिनेट ने दुष्कर्म और पॉक्सो (बाल यौन शोषण निवारण) अधिनियम के मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालयों (एफटीएससी) की केंद्र प्रायोजित योजना को अगले पांच वर्षों के लिए जारी रखने की मंजूरी दी है। इस फैसले के तहत योजना की अवधि 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक बढ़ाई गई है।

इस योजना का कुल वित्तीय परिव्यय 3,788.04 करोड़ रुपए निर्धारित किया गया है। इसमें से केंद्र सरकार का हिस्सा 2,353.15 करोड़ रुपए होगा, जिसे 'निर्भया फंड' से वित्त पोषित किया जाएगा। शेष 1,434.89 करोड़ रुपए का बोझ राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों पर होगा। सरकार का मानना है कि इस विस्तार से न्यायपालिका की संस्थागत क्षमता और मजबूत होगी और पीड़ितों को समय पर न्याय मिलेगा।

न्यायालयों की संख्या में वृद्धि और संरचना

वर्तमान में देश में 779 फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालयों का संचालन हो रहा है, जिनमें से 399 विशेष पॉक्सो न्यायालय हैं। कैबिनेट के नए फैसले के तहत इन न्यायालयों की कुल संख्या बढ़ाकर 850 की जाएगी। यह वृद्धि सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लंबित मामलों के आंकड़ों के आधार पर की जाएगी, ताकि अतिरिक्त जिलों में भी कवरेज बढ़ाया जा सके।

योजना के तहत प्रत्येक न्यायालय के लिए समर्पित न्यायिक अधिकारी, एक विशिष्ट विशेष लोक अभियोजक और छह सहायक स्टाफ का प्रावधान है। विशेष लोक अभियोजक की नियुक्ति का उद्देश्य सुनवाई की प्रक्रिया को तेज करना और सुनिश्चित करना है कि लंबित मामले जल्द निपटाए जा सकें।

पीड़ितों के लिए सुविधाजनक वातावरण

इस योजना का प्राथमिक लाभार्थी महिलाएं और बच्चे हैं, जो यौन अपराधों के शिकार होते हैं। योजना के अंतर्गत कमजोर गवाह बयान केंद्रों और बच्चों के अनुकूल अदालत स्थानों की स्थापना को प्रोत्साहित किया जाएगा। इससे पीड़ितों की गवाही देने की प्रक्रिया को आगे संकट पैदा किए बिना सुविधाजनक बनाया जा सकेगा।

योजना की निगरानी न्याय विभाग द्वारा की जाएगी। विभाग एफटीएससी डैशबोर्ड, आवधिक प्रगति रिपोर्ट और राज्य के व्यय विवरण के माध्यम से प्रदर्शन की जांच करेगा। इसके अलावा, न्याय विभाग उच्च न्यायालयों और राज्य सरकारों के साथ परामर्श भी करेगा।

पृष्ठभूमि और प्रदर्शन

यह योजना मूल रूप से 2 अक्टूबर 2019 को शुरू की गई थी। यह आपराधिक कानून (संशोधन) अधिनियम, 2018 के अनुसरण में और सुप्रीम कोर्ट के 25 जुलाई 2019 के निर्देशों के अनुपालन में लागू की गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने पॉक्सो अधिनियम के तहत 100 से अधिक लंबित मामलों वाले जिलों में विशिष्ट विशेष न्यायालयों की स्थापना का निर्देश दिया था।

योजना की शुरुआत से अब तक कुल 4,02,457 मामले निपटाए जा चुके हैं। पहले यह योजना एक वर्ष के लिए शुरू की गई थी और बाद में इसे 31 मार्च 2026 तक बढ़ा दिया गया था। अब लिया गया फैसला इसे 2031 तक जारी रखने का सुनिश्चित करता है।

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पृष्ठभूमि

यह योजना सुप्रीम कोर्ट के 2019 के निर्देशों और आपराधिक कानून संशोधन अधिनियम के अनुरूप शुरू की गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य उन जिलों में जहां पॉक्सो के 100 से अधिक मामले लंबित थे, विशेष न्यायालयों की स्थापना करना था।

स्रोत

यह ख़बर इन 3 स्रोतों के आधार पर तैयार की गई है:

  • punjabkesari.com — दुष्कर्म और पॉक्सो मामलों में मिलेगा त्वरित न्याय, कैबिनेट ने फास्ट ट्रैक कोर्ट योजना को 2031 तक बढ़ाया
  • mpbreakingnews.in — मोदी कैबिनेट ने लिए कई बड़े फैसले, अग्निपथ योजना में बदलाव, POCSO-दुष्कर्म मामलों के लिए 850 फास्ट ट्रैक कोर्ट…
  • bhaskarhindi.com — देश के सांख्यिकीय ढांचे को मजबूत करने के लिए केंद्र ने 'विस्तार' योजना को दी मंजूरी; 4,371.10 करोड़ रुपए होंगे खर्च | ??? ?? ?????????? ????? ?? ????? ???? ?? ??? ?????? ?? '???????' ????? ?? ?? ??????; 4,371.10 ????? ???? ????? ????

यह लेख ऊपर दिए स्रोतों के आधार पर आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस की मदद से लिखा गया है। हम कैसे काम करते हैं।

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